US-Iran War: डोनाल्ड ट्रंप का चौंकाने वाला ऐलान, '2-3 हफ्ते में खत्म होगा युद्ध'; शेयर बाजार में आया भयंकर उछाल
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विनाशकारी युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत बड़ा बयान दिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर इस महाजंग पर पूर्ण विराम लग सकता है। उनके इस ऐलान के बाद न सिर्फ वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई है, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी जबरदस्त तेजी लौट आई है।
शेयर बाजार गदगद, क्रूड ऑयल के गिरे दाम
युद्ध खत्म होने की आहट मिलते ही अमेरिकी शेयर बाजार रॉकेट की तरह भागने लगे। नैस्डैक (Nasdaq) में करीब 3.83% और एसएंडपी-500 (S&P 500) में 2.91% का भारी उछाल दर्ज किया गया। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा, जहां जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के इंडेक्स हरे निशान पर बंद हुए। सबसे बड़ी राहत कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर मिली है, जो गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए भी गुड न्यूज है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) 340 अंक ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो आज मार्केट में बंपर गैप-अप ओपनिंग का साफ इशारा है।
सैन्य लक्ष्य पूरा, अब वापसी की तैयारी में अमेरिका
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य मकसद ईरान के सैन्य ढांचे, खासकर उसकी नौसेना और मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह से तबाह करना था, जिसे लगभग हासिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिकी सेना के वहां ज्यादा समय तक रुकने का कोई औचित्य नहीं है। अगले दो से तीन सप्ताह में अमेरिकी सैनिक वापस लौट आएंगे। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि इस बीच अगर ईरान बातचीत की टेबल पर नहीं आता है, तो अमेरिकी हमले जारी रहेंगे।
मित्र देशों पर फूटा ट्रंप का गुस्सा- 'अपना तेल खुद बचाओ'
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुलवाने के मुद्दे पर ट्रंप ने नाटो (NATO) और अन्य सहयोगी देशों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर भड़ास निकालते हुए लिखा कि अमेरिका हमेशा दूसरों की मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा। ट्रंप का तर्क है कि होर्मुज रूट के बंद होने से यूरोप और एशिया को ज्यादा नुकसान है, क्योंकि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट के तेल पर ज्यादा निर्भर नहीं है। उन्होंने दोटूक लहजे में सहयोगियों से कहा कि वे अपने तेल की सुरक्षा खुद करना सीखें।
क्या होर्मुज का रास्ता साफ किए बिना ही लौट जाएगा अमेरिका?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग (होर्मुज) को पूरी तरह खोले बिना ही पीछे हट जाएगा। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, अब इस मार्ग को खोलना अमेरिका के लिए युद्ध खत्म करने की अनिवार्य शर्त नहीं रह गई है। अगर अमेरिका बिना रास्ता साफ कराए निकल जाता है, तो ईरान इस रूट पर अपना दबदबा और मजबूत कर लेगा, जो भविष्य में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
महंगाई और चुनावों का दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अचानक लिया गया फैसला अमेरिकी घरेलू राजनीति और आर्थिक दबाव से प्रेरित है। नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी पर हार का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन के पार जा चुकी हैं, जिससे आम अमेरिकी जनता में भारी नाराजगी है। अपने चुनाव प्रचार में 'कोई नया युद्ध नहीं' शुरू करने का वादा करने वाले ट्रंप अब जल्द से जल्द इस सैन्य उलझन से बाहर निकलना चाहते हैं ताकि चुनावों में नुकसान से बचा जा सके।