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April 05 2026 04:14 am

हवाई सफर करने वालों को जोर का झटका! 115% महंगा हुआ जेट फ्यूल, इतिहास में पहली बार ₹2 लाख के पार पहुंची कीमत

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नई दिल्ली: अगर आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो अपना बजट तुरंत बढ़ा लीजिए। मिडिल ईस्ट (Middle East) में भड़के युद्ध की आग अब सीधे आपकी जेब तक पहुंच गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की नई और डराने वाली कीमतों का ऐलान कर दिया है। अप्रैल महीने के लिए जेट फ्यूल के दामों में 115% तक का ऐतिहासिक और छप्परफाड़ उछाल आया है। भारतीय एविएशन सेक्टर के इतिहास में यह पहला मौका है, जब जेट फ्यूल की कीमत ₹2 लाख प्रति किलो लीटर (KL) के पार निकल गई है।

दिल्ली से मुंबई तक कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

तेल कंपनियों द्वारा जारी नए रेट्स ने एयरलाइंस से लेकर यात्रियों तक की नींद उड़ा दी है। राजधानी दिल्ली (IGIA) में घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले ATF की कीमत पिछले महीने के ₹96,638.14 से छलांग लगाकर सीधे ₹2,07,341.22 प्रति किलो लीटर हो गई है। यह करीब 114.5% की वृद्धि है। वहीं, आर्थिक राजधानी मुंबई (CSMIA) में भी कीमतें 115% बढ़कर ₹1,94,968.67 प्रति KL पर पहुंच गई हैं। चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में भी ईंधन के दाम ₹2 लाख का जादुई आंकड़ा पार कर चुके हैं।

विदेशी उड़ानें भी हुईं महंगी, डॉलर की मार ने बढ़ाई टेंशन

यह महंगाई सिर्फ घरेलू उड़ानों तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी ईंधन की कीमतों में आग लगी हुई है। भारतीय एयरलाइंस के लिए इंटरनेशनल फ्यूल अब $1,000 प्रति KL के स्तर को काफी पीछे छोड़ चुका है। दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह $1,690.81 प्रति KL (107% का उछाल) और कोलकाता में सबसे अधिक $1,727.3 प्रति KL तक पहुंच गया है। ऊपर से रुपये की लगातार गिरती कीमत ने एयरलाइंस के लिए 'कोढ़ में खाज' वाला काम किया है, क्योंकि विदेशी उड़ानों के ईंधन का भुगतान डॉलर में ही करना पड़ता है।

विमान कंपनियों पर मंडराया 'अस्तित्व' का संकट

एविएशन इंडस्ट्री के लिए ईंधन हमेशा से सबसे बड़ा खर्च रहा है। एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) का 40 से 45% हिस्सा अकेले जेट फ्यूल पर खर्च होता है। दामों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद छोटी एयरलाइंस के लिए तो उड़ानें जारी रखना ही मुश्किल हो जाएगा। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन (Campbell Wilson) ने इस संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध के कारण यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानें पहले ही लंबे रास्तों से होकर गुजर रही हैं, जिससे ईंधन की खपत बेतहाशा बढ़ गई है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि लागत बढ़ने और मांग घटने की आशंका के चलते एयरलाइंस को मजबूरन अपनी उड़ानों की संख्या कम करनी पड़ सकती है।

आम आदमी की जेब पर सीधा असर, आसमान छुएगा किराया

इस पूरी उठापटक का अंतिम खामियाजा आम यात्रियों को ही भुगतना होगा। एयरलाइंस कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ यात्रियों के कंधों पर डालने की तैयारी कर चुकी हैं। चिंता की बात यह भी है कि सरकार ने हाल ही में 21 मार्च 2026 को घरेलू उड़ानों पर लगी ₹18,000 की 'फेयर कैप' (किराये की ऊपरी सीमा) भी हटा ली है। इसका सीधा मतलब है कि अब एयरलाइंस मनमाने दाम वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। इंडिगो, एयर इंडिया और आकासा जैसी प्रमुख एयरलाइंस पहले से ही ₹150 से लेकर $200 तक का फ्यूल सरचार्ज वसूल रही हैं। जानकारों का मानना है कि अब इस सरचार्ज में भारी इजाफा किया जाएगा, जिससे फ्लाइट की टिकटें आम आदमी के बजट से बाहर हो सकती हैं।