UPI New Rules 2026: आज से बदल गया UPI पेमेंट का नियम! ₹2000 से अधिक के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर लगेगा 1.1% चार्ज, जानें किसे देना होगा पैसा
टेक डेस्क, नई दिल्ली। भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई (UPI) को लेकर एक बड़ा बदलाव आज यानी 1 फरवरी 2026 से लागू हो गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब ₹2000 से अधिक के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1.1 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क (Interchange Charge) देना होगा। सरकार और एनपीसीआई का यह कदम यूपीआई इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से मजबूत करने और संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।
अभी तक यूपीआई के जरिए होने वाले सभी लेनदेन मुफ्त थे, लेकिन अब बड़े अमाउंट के ऑनलाइन भुगतान पर ग्राहकों को सावधानी बरतनी होगी।
किन ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज? (Merchant vs Personal)
यूजर्स के बीच इस नियम को लेकर काफी भ्रम है, जिसे एनपीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है:
ऑनलाइन मर्चेंट ट्रांजैक्शन: यदि आप ई-कॉमर्स साइट (जैसे Amazon, Flipkart), ऑनलाइन फूड डिलीवरी, या किसी ऐप के जरिए ₹2000 से अधिक की खरीदारी करते हैं, तो 1.1% का चार्ज लागू होगा।
P2P ट्रांसफर (व्यक्ति से व्यक्ति): राहत की बात यह है कि यदि आप अपने किसी मित्र या रिश्तेदार को पैसे भेज रहे हैं, तो वह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
ऑफलाइन QR कोड: स्थानीय दुकानों या किराना स्टोर पर क्यूआर कोड स्कैन करके किए जाने वाले भुगतान पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
जेब पर कितना पड़ेगा बोझ? (Calculation)
नए नियम के तहत, यदि आप ₹5000 का कोई ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, तो आपको ₹55 अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं। यह चार्ज ट्रांजैक्शन के समय ही ऐप पर दिखाई देगा। PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे सभी प्रमुख ऐप्स ने अपनी प्रणालियों में इसे अपडेट करना शुरू कर दिया है।
क्या है 10 लाख की मासिक सीमा?
आम यूजर्स को राहत देने के लिए एनपीसीआई ने एक 'फेयर यूज' पॉलिसी भी बनाई है:
फ्री लिमिट: एक यूजर प्रति माह कुल ₹10 लाख तक के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन बिना किसी चार्ज के कर सकता है।
चार्ज कब लगेगा: जब महीने का कुल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन ₹10 लाख की सीमा को पार कर जाएगा, तभी से हर ₹2000+ के पेमेंट पर चार्ज कटना शुरू होगा। इससे छोटे उपभोक्ताओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
एनपीसीआई के अनुसार, रोजाना होने वाले करोड़ों ट्रांजैक्शन से बैंकिंग सिस्टम पर लोड बहुत बढ़ गया था। इसके अलावा:
वित्तीय स्थिरता: फिनटेक कंपनियों और बैंकों को सिस्टम बनाए रखने के लिए राजस्व (Revenue) की जरूरत है।
फ्रॉड पर लगाम: बड़े ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने से फर्जी कलेक्ट रिक्वेस्ट और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
सिस्टम का नियंत्रण: असीमित फ्री इस्तेमाल को नियंत्रित कर संसाधनों को सुरक्षित करना।
विशेषज्ञों की सलाह
अब बड़े ऑनलाइन भुगतान के लिए यूजर्स को क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग जैसे अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, छोटे दैनिक खर्चों (जैसे सब्जी, फल या चाय) के लिए यूपीआई अभी भी सबसे सुलभ और मुफ्त माध्यम बना रहेगा।