RBI Credit Card Rules : क्रेडिट कार्ड यूजर्स की मौज अब लेट फीस पर नहीं लगेगा ब्याज का बोझ, RBI ने बदले नियम

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News India Live, Digital Desk: अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। RBI ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए बैंकों और कार्ड जारी करने वाली संस्थाओं के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब कार्ड पेमेंट में हुई छोटी सी देरी आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ेगी।

1. ग्रेस पीरियड (Grace Period) का फायदा

RBI के नए नियमों के मुताबिक, अब बैंक केवल नियत तिथि (Due Date) समाप्त होते ही लेट फीस नहीं लगा सकते।

3 दिन की मोहलत: भुगतान की तारीख निकलने के बाद ग्राहकों को 3 दिनों का ग्रेस पीरियड देना अनिवार्य है। लेट फीस तभी वसूली जा सकती है जब भुगतान नियत तिथि के 3 दिन बाद तक भी न किया गया हो।

क्रेडिट स्कोर पर असर: यदि आप इन 3 दिनों के भीतर भुगतान कर देते हैं, तो न केवल आप लेट फीस से बचेंगे, बल्कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (CIBIL Score) पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

2. लेट फीस पर नहीं लगेगा ब्याज (No Interest on Late Fee)

अक्सर बैंक लेट फीस के ऊपर भी ब्याज और अन्य शुल्क जोड़ देते थे, जिससे बकाया राशि पहाड़ जैसी हो जाती थी।

RBI का निर्देश: अब लेट फीस केवल एक निश्चित राशि (Fixed Amount) होगी। बैंक लेट पेमेंट चार्ज पर ब्याज या कोई अतिरिक्त चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) नहीं लगा सकेंगे।

3. बिलिंग चक्र (Billing Cycle) में बदलाव की आजादी

ग्राहकों को अब अपने क्रेडिट कार्ड के बिलिंग चक्र को अपनी सुविधा अनुसार चुनने का अधिकार मिलेगा।

एक बार बदलाव की अनुमति: ग्राहक अपनी सैलरी या अन्य आय के हिसाब से महीने में कम से कम एक बार अपनी 'बिलिंग तिथि' (Billing Date) बदलने का अनुरोध कर सकते हैं। बैंकों को इसे स्वीकार करना होगा।

4. कार्ड क्लोजर (Card Closure) नियम

7 दिनों में बंद करना होगा कार्ड: यदि कोई ग्राहक अपना क्रेडिट कार्ड बंद करना चाहता है, तो बैंक को यह प्रक्रिया 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करनी होगी। देरी होने पर बैंक को ग्राहक को प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना देना होगा।

निष्कर्ष और ग्राहकों के लिए टिप:

RBI के इन कदमों का उद्देश्य क्रेडिट कार्ड ट्रांजेक्शन को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाना है। हालांकि, ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा समय पर भुगतान करें ताकि अनावश्यक ब्याज (जो 30-45% तक हो सकता है) से बचा जा सके।