Shankaracharya vs Yogi : योगी मुख्यमंत्री कैसे हो सकते हैं? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का CM योगी पर बड़ा हमला, छिड़ा नया विवाद

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News India Live, Digital Desk : धर्म और राजनीति के बीच की लकीर एक बार फिर धुंधली होती दिख रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शंकराचार्यों को लेकर की गई एक टिप्पणी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने न केवल सीएम के बयान को शास्त्र विरुद्ध बताया, बल्कि उनके 'योगी' होने के साथ-साथ 'मुख्यमंत्री' पद संभालने पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।

विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्यों की भूमिका और उनके बयानों के संदर्भ में कुछ बातें कहीं थीं।

शंकराचार्य का तर्क: अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक व्यक्ति जो 'योगी' होने का दावा करता है, वह सत्ता के सिंहासन पर कैसे बैठ सकता है?

पद की गरिमा: उन्होंने तर्क दिया कि शास्त्र के अनुसार, संन्यास और सत्ता (राजदंड) अलग-अलग मार्ग हैं। यदि कोई संन्यासी है, तो उसे राजनीति से दूर रहना चाहिए, और यदि वह राजनीति में है, तो उसे 'योगी' कहलाने का अधिकार नहीं है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बात करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए:

परंपरा पर चोट: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और राजनेता धार्मिक पदों और परंपराओं में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं।

शंकराचार्य पद की व्याख्या: उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का पद किसी व्यक्ति की पसंद-नापसंद नहीं, बल्कि शास्त्रों और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपराओं से तय होता है।

विपक्षी भूमिका: शंकराचार्य ने कहा कि अगर हम धर्म की रक्षा के लिए सच बोलते हैं, तो उसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

यह पहला मौका नहीं है जब अविमुक्तेश्वरानंद ने भाजपा या योगी सरकार के फैसलों पर असहमति जताई हो। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भी उनके बयानों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब 'योगी और मुख्यमंत्री' के सामंजस्य पर उनके इस प्रहार ने समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों को भी चर्चा का नया मौका दे दिया है।