UP Urban Budget 2026 : यूपी के शहरों का बदलेगा चेहरा योगी सरकार खर्च करेगी ₹25,000 करोड़ स्मार्ट सिटी
News India Live, Digital Desk: केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणाओं के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के बजट को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। यूपी का आगामी बजट 11 फरवरी 2026 को पेश किया जाना है। इसमें नगर विकास विभाग को मिली भारी भरकम राशि से न केवल लखनऊ और कानपुर जैसे महानगरों, बल्कि नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को भी 'स्मार्ट' बनाया जाएगा।
बजट का मुख्य आवंटन: कहाँ कितना होगा खर्च?
नगर विकास विभाग ने बिंदुवार बजट प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें राज्य और केंद्र की संयुक्त भागीदारी वाली योजनाएं शामिल हैं:
| योजना का नाम | आवंटित राशि (करोड़ में) | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) | ₹4,100 | जलापूर्ति, सीवरेज और पार्कों का विकास |
| स्वच्छ भारत मिशन 2.0 | ₹2,421 | ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता |
| सीएम ग्रिड्स (CM-GRIDS) | ₹800 | शहरों में मॉडल सड़कों का निर्माण |
| मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना | ₹800 | नए शहरी निकायों में बुनियादी सुविधाएं |
| मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय | ₹600 | शहरों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना |
| राज्य स्मार्ट सिटी मिशन | ₹500 | 17 नगर निगमों का तकनीकी आधुनिकीकरण |
प्रमुख विकास परियोजनाएं और उनके प्रभाव
1. प्रदूषण मुक्त शहर और ग्रीन रोड
बजट में शहरों के बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत 'ग्रीन रोड' के लिए ₹800 करोड़ दिए गए हैं, जिससे सड़कों के किनारे हरियाली और प्रदूषण कम करने वाली तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
2. स्मार्ट नगर पालिका और पंचायत
योगी सरकार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। बजट में 'स्मार्ट नगर पालिका' के लिए ₹145 करोड़ और 'आदर्श नगर पंचायत' के लिए ₹200 करोड़ प्रस्तावित हैं। इससे छोटे कस्बों में भी सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।
3. धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों का कायाकल्प
अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे शहरों के बुनियादी ढांचे के लिए अलग से ₹50 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यहाँ सड़कों के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वोटर लिस्ट और चुनावी साल का प्रभाव
चूंकि 2026 में पंचायत चुनाव होने हैं, इसलिए सरकार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति दे रही है। नगर विकास विभाग का यह ₹25,000 करोड़ का बजट सीधे तौर पर आम आदमी की 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) में सुधार करेगा।