UP Big Decision: स्कूल-अस्पताल खोलने के लिए अब नहीं चाहिए होगी एकड़ में जमीन योगी सरकार ने खत्म की भूमि की अनिवार्यता
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में अब छोटे भूखंडों पर भी बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान खुल सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नगर विकास और आवास विभाग ने नई 'भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2025-26' का मसौदा तैयार किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य शहरी इलाकों में घनी आबादी के बीच बुनियादी सुविधाओं (शिक्षा और स्वास्थ्य) की पहुंच को आसान बनाना है।
क्या है मौजूदा नियम और क्या होगा बदलाव?
अब तक उत्तर प्रदेश में किसी भी बड़े संस्थान को शुरू करने के लिए भूमि का एक बड़ा हिस्सा होना अनिवार्य था, जिसे अब समाप्त या बहुत कम किया जा रहा है:
| संस्थान | पुराना नियम (अनिवार्यता) | नया नियम (प्रस्तावित) |
|---|---|---|
| अस्पताल / नर्सिंग होम | पहले 20,000 वर्ग मीटर तक जमीन अनिवार्य थी। | अब मात्र 3,000 वर्ग मीटर पर नक्शा पास होगा। |
| ग्रुप हाउसिंग / अपार्टमेंट | न्यूनतम 2,000 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत थी। | अब महज 1,000 वर्ग मीटर पर मंजूरी मिल जाएगी। |
| मेडिकल स्टोर / फार्मेसी | न्यूनतम 300 वर्ग मीटर भूमि की शर्त थी। | अब इसे घटाकर 100 वर्ग मीटर कर दिया गया है। |
| स्कूल / विश्वविद्यालय | एकड़ में फैली जमीन की शर्त थी। | वर्टिकल ग्रोथ (ऊंची इमारतों) को प्राथमिकता दी जाएगी। |
क्यों लिया गया यह फैसला? (The Objective)
शहरी क्षेत्रों में जमीन की कमी: बड़े शहरों (जैसे लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा) के अंदर अब एकड़ में खाली जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पुराने नियमों के कारण नए अस्पताल या स्कूल केवल शहर की बाहरी सीमाओं (Outskirts) पर ही बन पा रहे थे।
वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा: सरकार का मानना है कि अब जमीन के विस्तार (Horizontal) के बजाय इमारतों की ऊंचाई (Vertical) बढ़ाकर सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
लाइसेंस और मंजूरी में आसानी: इस बदलाव के साथ ही अनावश्यक निरीक्षण और मंजूरी की जटिलताओं को भी खत्म किया जाएगा, जिससे उद्यमी और डॉक्टर आसानी से अपने प्रोजेक्ट शुरू कर सकेंगे।
पार्किंग और सुरक्षा पर विशेष जोर
जमीन की अनिवार्यता खत्म करने के साथ ही सरकार ने कुछ कड़ी शर्तें भी जोड़ी हैं ताकि अव्यवस्था न फैले:
सड़क की चौड़ाई: अस्पताल के लिए सड़क की चौड़ाई की शर्त को 18 मीटर से घटाकर 12 मीटर किया गया है, लेकिन एम्बुलेंस के लिए अलग से 'पार्किंग बे' बनाना अनिवार्य होगा।
पिक एंड ड्रॉप जोन: स्कूलों को अपनी सीमा के अंदर ही बच्चों को उतारने और चढ़ाने (Pick & Drop) के लिए जगह देनी होगी ताकि सड़क पर जाम न लगे।
मैकेनाइज्ड पार्किंग: कम जमीन पर अधिक वाहनों के लिए मल्टी-लेवल या मैकेनाइज्ड पार्किंग को अनिवार्य किया जाएगा।