UP Politics : योगी के मंत्री को बंधक बनाना पड़ा भारी BJP ने विधायक बृजभूषण राजपूत पर लिया बड़ा एक्शन

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में अनुशासन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक कड़ा संदेश दिया है। महोबा में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को कथित तौर पर 'बंधक' बनाने और उनके साथ अभद्र व्यवहार करने के मामले में पार्टी ने अपने ही विधायक बृजभूषण राजपूत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस घटना ने न केवल संगठन के भीतर के असंतोष को उजागर किया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।

1. क्या है पूरा विवाद? (The Incident)

घटना महोबा जिले की है, जहां जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एक विभागीय कार्यक्रम और कार्यकर्ताओं से मुलाकात के लिए पहुंचे थे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और क्षेत्र की समस्याओं, विशेषकर पानी और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी जाहिर की। बात इतनी बढ़ गई कि विधायक और उनके समर्थकों ने मंत्री के काफिले को रोक लिया, जिसे 'बंधक' बनाने जैसी स्थिति के रूप में देखा गया।

2. BJP का 'हंटर': विधायक को कारण बताओ नोटिस

पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त न करने की नीति के तहत, बीजेपी प्रदेश नेतृत्व ने इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया।

अनुशासनात्मक कार्रवाई: पार्टी ने विधायक बृजभूषण राजपूत को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया है।

स्पष्टीकरण की मांग: उनसे पूछा गया है कि एक कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता के साथ इस तरह का सार्वजनिक आचरण क्यों किया गया? संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पार्टी से निलंबित भी किया जा सकता है।

3. विधायक बृजभूषण राजपूत का पक्ष

वहीं, विधायक बृजभूषण राजपूत का कहना है कि उन्होंने मंत्री को बंधक नहीं बनाया, बल्कि वे जनता की समस्याओं को मजबूती से रख रहे थे। उनका आरोप है कि अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे हैं और क्षेत्र में जल संकट गहराया हुआ है। हालांकि, जिस तरीके से उन्होंने अपनी बात रखी, उसे पार्टी हाईकमान ने "मर्यादा का उल्लंघन" माना है।

4. स्वतंत्र देव सिंह की प्रतिक्रिया

कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इस घटना पर सीधा बयान देने से बचते हुए इसे परिवार का आंतरिक मामला बताया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और प्रदेश संगठन को सौंप दी गई है, जिसके बाद ही कार्रवाई शुरू हुई है।