UP Politics: वोटर लिस्ट से नाम कटवाने का बड़ा खेल! सरोजिनी नगर में एक ही व्यक्ति ने भरे 100 से ज्यादा फॉर्म-7, BLO के खुलासे से मचा हड़कंप
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच वोटर लिस्ट में नाम कटवाने को लेकर एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जब जमीनी हकीकत खंगाली गई, तो लखनऊ की सरोजिनी नगर विधानसभा सीट के चिल्लावां गांव में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि एक ही व्यक्ति ने 100 से अधिक लोगों के नाम कटवाने के लिए 'फॉर्म-7' जमा किए, जबकि वे सभी मतदाता न केवल जीवित हैं बल्कि उसी क्षेत्र के निवासी भी हैं।
चिल्लावां प्राथमिक विद्यालय: BLO ने किया बड़ा खुलासा
ग्राउंड जीरो पर जांच के दौरान चिल्लावां प्राथमिक विद्यालय में तैनात तीन बीएलओ (BLO) ने इस साजिश की पुष्टि की है।
सैकड़ों फॉर्म हुए जमा: एक बीएलओ के पास 127, दूसरे के पास 27 और तीसरे के पास लगभग 50 फॉर्म नाम काटने के लिए आए थे।
जीवित लोगों को बताया 'मृत/अनुपस्थित': बीएलओ ने बताया कि जब उन्होंने इन फॉर्मों की जांच की, तो पता चला कि जिन लोगों के नाम काटने का आवेदन किया गया है, वे सभी वहीं रह रहे हैं और जीवित हैं। इसके बाद बीएलओ ने इन नामों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया रोक दी।
मतदाताओं का आक्रोश: 'हम जीवित हैं, फिर भी साजिश क्यों?'
मौके पर मौजूद उन मतदाताओं ने भारी रोष व्यक्त किया जिनके नाम कटवाने की साजिश रची गई थी। पीड़ितों ने दिखाया कि उनके नाम के आगे दशरथ कुमार (दशरथ यादव) नाम के व्यक्ति द्वारा आवेदन किया गया था। मतदाताओं का कहना है कि वे सालों से यहीं रह रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें अनुपस्थित दिखाकर उनका लोकतांत्रिक अधिकार छीनने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
आरोपी और BLO के बीच तीखी बहस: 'मुझ पर दबाव बनाया गया'
जब इस मामले के मुख्य आरोपी दशरथ कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने सारा ठीकरा बीएलओ पर फोड़ दिया। दशरथ का दावा है कि बीएलओ ने ही उन्हें फॉर्म उपलब्ध कराए थे। हालांकि, जब बीएलओ को मौके पर बुलाया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो गई:
BLO का दावा: बीएलओ ने आरोप लगाया कि दशरथ कुमार उन पर नाम काटने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।
सबूतों की बात: बीएलओ ने दावा किया कि उनके पास इस दबाव के पुख्ता साक्ष्य और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद हैं।
आमने-सामने की बहस: गांव वालों की मौजूदगी में बीएलओ और आरोपी के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें बीएलओ ने स्पष्ट किया कि दशरथ ने ही संदिग्ध (Doubtful) बताकर ये फॉर्म जमा किए थे।
क्या है फॉर्म-7 का विवाद?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि बीजेपी के लोग एक सुनियोजित रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी के समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से कटवा रहे हैं। लखनऊ का यह मामला अब निर्वाचन आयोग के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।