Trump vs Khamenei : ओमान में परमाणु वार्ता से पहले ट्रंप की खामेनेई को सीधी चेतावनी
News India Live, Digital Desk : मध्य-पूर्व (Middle East) में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ओमान में प्रस्तावित परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) की मेज पर बैठने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई (Ayatollah Khamenei) को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप के इस बयान ने न केवल राजनयिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि आगामी बातचीत की सफलता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
परमाणु वार्ता से पहले 'धमकी' वाली कूटनीति
ओमान में होने वाली यह बैठक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए आयोजित की जा रही है। हालांकि, ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका किसी भी ऐसी शर्त को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी सुरक्षा के खिलाफ हो। ट्रंप ने सोशल मीडिया और प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से संकेत दिया कि यदि ईरान ने अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा, तो उसे "अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों और परिणामों" का सामना करना पड़ेगा।
ईरान का रुख: 'दबाव में नहीं झुकेंगे'
दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। तेहरान से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई ने कहा है कि ईरान किसी भी प्रकार की धमकी के आगे नहीं झुकेगा और अपने परमाणु अधिकारों के साथ समझौता नहीं करेगा। ईरान का तर्क है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका इसे हथियार बनाने की कोशिश मानता है।
ओमान की मध्यस्थता पर टिकी दुनिया की नजरें
ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक 'बैक-चैनल' मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। मस्कट में होने वाली इस वार्ता का उद्देश्य 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) को नए स्वरूप में पुनर्जीवित करना है, जिससे ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में अमेरिका को बाहर कर लिया था। अब दोबारा सत्ता में आने के बाद ट्रंप 'मैक्सिमम प्रेशर' (Maximum Pressure) की नीति को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू कर रहे हैं।
क्या होगा अगर वार्ता विफल रही?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ओमान वार्ता बेनतीजा रहती है, तो:
कच्चे तेल की कीमतें: वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
सैन्य तनाव: खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में अमेरिकी सेना और ईरान समर्थित समूहों के बीच सीधा टकराव बढ़ सकता है।
प्रतिबंधों की मार: ईरान की अर्थव्यवस्था पर और भी विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं।
इजरायल और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
इजरायल ने ट्रंप के इस कड़े रुख का स्वागत किया है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संकेत दिया गया है कि वे ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वहीं, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश इस तनाव के बीच फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनके क्षेत्र में एक और बड़ा युद्ध शुरू हो।