चकराता छोड़ अब इस जादुई हिल स्टेशन का रुख कर रहे हैं पर्यटक

चकराता छोड़ अब इस जादुई हिल स्टेशन का रुख कर रहे हैं पर्यटक

उत्तराखंड और हिमाचल की पहाड़ियों में सजी प्राकृतिक सुंदरता हमेशा से देश भर के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से पर्यटकों की पसंद और रुझान में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड के बेहद लोकप्रिय और शांत माने जाने वाले हिल स्टेशन 'चकराता' की भीड़-भाड़ से ऊबकर अब पर्यटक एक ऐसे नए और बेहद खूबसूरत ठिकाने का रुख कर रहे हैं, जिसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। राजधानी दिल्ली से मात्र साढ़े छह घंटे की सुहानी ड्राइव के बाद पहुंचाई जा सकने वाली यह नई जगह अपनी बर्फीली चोटियों, घने देवदार के जंगलों और कोलाहल से कोसों दूर शांत वातावरण के लिए इन दिनों टूरिस्टों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। यदि आप भी इस वीकेंड किसी ऐसे अनछुए और जादुई हिल स्टेशन की तलाश में हैं जहां शिमला या मसूरी जैसी भागदौड़ और ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े, तो यह डेस्टिनेशन आपके लिए एकदम परफेक्ट साबित होने वाला है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन सा है यह नया हिल स्टेशन और क्यों लोग चकराता को छोड़कर यहां तेजी से पहुंच रहे हैं।

क्यों हो रहा है पर्यटकों का मोहभंग: चकराता की बढ़ती भीड़ और कमर्शियल बदलावों से कैसे दूर जा रहे हैं सैलानी

पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड का चकराता अपनी प्राकृतिक सुंदरता और कैंट एरिया की शांति के चलते वीकेंड गेटअवे के रूप में बहुत तेजी से उभरा था, जिसके कारण वहां पर्यटकों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्थिति यह हो गई कि लंबे वीकेंड या छुट्टियों के दिनों में वहां भी अब अन्य बड़े हिल स्टेशनों की तरह गाड़ियों की लंबी कतारें, पार्किंग की समस्याएं और होटलों की भारी मारामारी देखने को मिलने लगी है, जिससे पर्यटकों को वह एकांत और मानसिक सुकून नहीं मिल पा रहा है जिसकी तलाश में वे पहाड़ों का रुख करते हैं। इसी वजह से ट्रैवलर्स अब ऐसे ऑफबीट और छिपे हुए पहाड़ी इलाकों की तलाश कर रहे हैं जहाँ प्रकृति अपने प्राचीन और शुद्ध रूप में मौजूद हो। यही कारण है कि दिल्ली और आसपास के राज्यों से आने वाले लोग अब चकराता के बजाय उससे भी आगे और अधिक ऊंचाई पर स्थित शांत वादियों की ओर अपनी गाड़ियां मोड़ रहे हैं, जहां उन्हें प्रकृति का असली और अनूठा आनंद मिल रहा है।

दिल्ली से साढ़े छह घंटे का यह सफर: रास्ते के मनमोहक रास्ते और बर्फीली वादियों का अद्भुत अहसास

राजधानी दिल्ली या एनसीआर के इलाकों से इस शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन तक पहुंचने के लिए लगभग 320 से 340 किलोमीटर की सड़क यात्रा तय करनी पड़ती है, जिसे अपनी कार या कैब से लगभग 6 से 7 घंटे के भीतर आसानी से पूरा किया जा सकता है। सफर की शुरुआत भले ही राष्ट्रीय राजमार्गों के मैदानी रास्तों से होती है, लेकिन जैसे ही आप उत्तराखंड या हिमाचल की तलहटी में प्रवेश करके उच्च हिमालयी मार्गों की ओर बढ़ते हैं, तो हवा की ठंडक और पहाड़ों की भव्यता आपका दिल जीत लेती है। रास्ते में मिलने वाले कल-कल बहते झरने, धुंध से ढकी पहाड़ियां और तीखे मोड़ों पर ड्राइव करने का रोमांच इस रोड ट्रिप को जीवनभर की यादगार बना देता है। जैसे-जैसे आप अपनी मंजिल के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे तापमान में गिरावट आने लगती है और दूर-दराज की बर्फीली चोटियां साफ तौर पर चमकती हुई नजर आने लगती हैं, जो पर्यटकों के सारे सफर की थकान को एक झटके में गायब कर देती हैं।

स्थानीय संस्कृति, खानपान और पर्यटन के आकर्षण: क्यों यह जगह बन रही है हर ट्रैवलर की पहली पसंद

इस शानदार हिल स्टेशन पर पहुंचने के बाद पर्यटकों के पास अनुभव करने के लिए अनगिनत प्राकृतिक और सांस्कृतिक खजाने मौजूद हैं। यहां के स्थानीय लोग अपनी गर्मजोशी और पारंपरिक आतिथ्य के लिए जाने जाते हैं, जो पर्यटकों को अपने घरों जैसे होमस्टे में पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठाने का मौका देते हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यहां के सनराइज और सनसेट पॉइंट्स किसी जन्नत से कम नहीं हैं, जहां से बादलों का समुद्र साफ तौर पर दिखाई देता है। ट्रेकिंग और नेचर वॉक करने वालों के लिए यहां के अनछुए रास्ते और चीड़-देवदार के जंगल रोमांच की एक नई परिभाषा गढ़ते हैं। यदि आप भी इस बार कुछ अलग, शांत और बर्फ से ढकी वादियों में वक्त बिताना चाहते हैं, तो बिना देर किए अपने बैग पैक कीजिए और निकल पड़िए इस नए और खूबसूरत पहाड़ी सफर पर।