दुबई की टैक्सी में छूटा पर्स, अंदर थी दिवंगत पिता की आखिरी निशानी: कैब ड्राइवर ने लौटाया तो छलक पड़े भारतीय महिला के आंसू

दुबई की टैक्सी में छूटा पर्स, अंदर थी दिवंगत पिता की आखिरी निशानी: कैब ड्राइवर ने लौटाया तो छलक पड़े भारतीय महिला के आंसू

विदेश की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी में जब कोई अपनी सबसे अनमोल चीज खो देता है, तो उस पर क्या बीतती है, इसका अहसास हाल ही में दुबई में रहने वाली एक भारतीय प्रवासी महिला को हुआ। ऑफिस और रोजमर्रा के काम के सिलसिले में कैब से सफर कर रही इस महिला का ध्यान उस वक्त भटक गया जब वह गंतव्य पर उतरते समय अपना हैंड पर्स पिछली सीट पर ही भूल गईं। उस पर्स में केवल क्रेडिट कार्ड, अमीरात आईडी या नकदी ही नहीं थी, बल्कि उसके एक छोटे से पारदर्शी खांचे में उनके स्वर्गीय पिता की आखिरी तस्वीर सहेज कर रखी हुई थी। घर पहुंचने के बाद जैसे ही महिला का हाथ खाली बैग पर पड़ा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कार्ड्स और पैसे दोबारा बन सकते थे, लेकिन पिता की वह अंतिम स्मृति किसी भी कीमत पर दोबारा हासिल नहीं की जा सकती थी। उस पल अजनबी शहर में महिला को हर तरफ सिर्फ मायूसी और लाचारी नजर आ रही थी।

पिता की आखिरी तस्वीर खोने के गम में टूट चुकी थीं भारतीय यात्री

महिला के अनुसार, उनके पिता का कुछ समय पहले देहांत हो गया था और उस कठिन दौर के बाद से वही छोटी सी तस्वीर उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल बनी हुई थी। वह जहां भी जाती थीं, उस पर्स को अपने सीने से लगाकर रखती थीं ताकि उन्हें अपने पिता के करीब होने का अहसास रहे। पर्स खोने के तुरंत बाद उन्होंने बदहवास हालत में टैक्सी बुकिंग ऐप पर अपनी हालिया राइड का ब्योरा खंगालना शुरू किया। दुबई की सड़कों पर हर मिनट हजारों गाड़ियां दौड़ती हैं और ऐसे में यह डर स्वाभाविक था कि कहीं अगली सवारी की नजर उस पर्स पर न पड़ जाए या वह हमेशा के लिए खो न जाए। महिला ने लगातार कई बार कस्टमर केयर और हेल्पलाइन पर संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन दिल की धड़कनें तेज थीं और आंखें लगातार बह रही थीं। उन्हें लग रहा था कि शायद उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी धरोहर को अपनी लापरवाही के चलते हमेशा के लिए खो दिया है।

टैक्सी ड्राइवर की देवदूत जैसी ईमानदारी: तलाशते हुए पहुंचाया खोया हुआ पर्स

इधर कैब ड्राइवर, जिन्हें आमतौर पर यात्री 'कैप्टन' कहकर बुलाते हैं, अपनी अगली राइड की तरफ बढ़ रहे थे। तभी अचानक उनकी नजर रियर-व्यू मिरर से पिछली सीट के कोने पर पड़े एक लेदर वॉलेट पर पड़ी। बिना एक पल की भी देरी किए और पर्स के साथ कोई छेड़छाड़ किए बगैर, ड्राइवर ने तुरंत अपनी ड्यूटी रोक दी। उन्होंने समझ लिया कि यह पर्स उसी भारतीय महिला यात्री का है जो कुछ देर पहले गाड़ी से उतरी थीं। कैब ड्राइवर ने तुरंत अपनी टैक्सी कंपनी के कंट्रोल रूम को अलर्ट किया और महिला के रजिस्टर्ड फोन नंबर पर संपर्क साधने की गुहार लगाई। जब फोन पर संपर्क हुआ, तो ड्राइवर ने महिला को सांत्वना दी और कहा कि वह बिल्कुल परेशान न हों, उनका पूरा सामान शत-प्रतिशत सुरक्षित है। इसके बाद ड्राइवर ने खुद अपनी गाड़ी घुमाई और महिला द्वारा बताए गए पते पर पहुंचकर आदरपूर्वक वह पर्स उनके हाथों में सौंप दिया।

छलक पड़े आंसू और जुबां से निकला- थैंक यू कैप्टन, आपने मेरी दुनिया बचा ली

जैसे ही महिला ने पर्स खोलकर सबसे पहले अपने पिता की उस सुरक्षित तस्वीर को देखा, वह अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाईं और वहीं फूट-फूट कर रो पड़ीं। पर्स में रखा हर एक दिरहम, सारे बैंक कार्ड्स और जरूरी दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित थे। महिला ने तुरंत ड्राइवर का आभार जताते हुए कहा कि आपने मुझे सिर्फ मेरा पर्स नहीं लौटाया, बल्कि मेरे दिवंगत पिता का आशीर्वाद और मेरी पूरी दुनिया मुझे वापस लौटा दी है। भावुक होकर उन्होंने ड्राइवर को 'थैंक यू कैप्टन' कहा और उनके इस निस्वार्थ काम के लिए उन्हें गले लगा लिया। महिला ने सम्मान और धन्यवाद के रूप में ड्राइवर को नकद इनाम देने की पेशकश भी की, लेकिन उस नेक दिल कैप्टन ने विनम्रता से मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ लिए और कहा कि यह उनका पेशेवर फर्ज और इंसानियत का धर्म था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई इंसानियत की मिसाल और दुबई की सुरक्षा व्यवस्था

इस भावुक वाकये को जब महिला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया, तो देखते ही देखते यह पोस्ट इंटरनेट पर वायरल हो गई। लाखों लोग उस कैब ड्राइवर की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूएई और खासकर दुबई अपनी सख्त कानूनी व्यवस्था, ईमानदारी और सुरक्षा के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, जहां अक्सर खोया हुआ लाखों का सोना या नकदी भी सही सलामत उनके मालिकों तक पहुंच जाती है। नेटिजन्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि तकनीक के इस आधुनिक दौर में भी जब लोग चंद पैसों के लिए ईमान डगमगा देते हैं, ऐसे में इस कैब चालक ने साबित कर दिया कि दुनिया में इंसानियत और नेकी आज भी पूरी शिद्दत से जिंदा है। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सच्चा हीरो वही होता है जो किसी की मजबूरी का फायदा उठाने के बजाय उसकी खोई हुई मुस्कान लौटा दे।