Dussehra Long Weekend 2026: दशहरे पर 4 दिन की छुट्टियों का शानदार मौका, घूमने के लिए ये 6 डेस्टिनेशन हैं सबसे बेस्ट; अभी कर लें बुकिंग
दौड़ती-भागती जिंदगी, ऑफिस के काम के दबाव और रोजमर्रा की आपाधापी के बीच यदि किसी लंबे वीकेंड का मौका मिल जाए, तो मन अपने आप नई ताजगी से भर जाता है। साल 2026 में दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए एक शानदार अवसर लेकर आया है। कैलेंडर के हिसाब से वीकेंड के साथ अगर आप केवल एक अतिरिक्त दिन की कैजुअल लीव (CL) या वर्क-फ्रॉम-होम प्लान कर लें, तो लगातार 4 दिनों का एक लंबा और आरामदायक वेकेशन आसानी से तैयार हो जाता है। अक्टूबर के महीने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस समय न तो चिलचिलाती गर्मी रहती है और न ही कंपकंपाने वाली कड़ाके की ठंड। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक मौसम में हल्की गुलाबी ठंडक की दस्तक हो जाती है, जो रोड ट्रिप, हिल स्टेशन की वादियों और ऐतिहासिक शहरों की सैर के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। यदि आप भी अपने परिवार, पार्टनर या दोस्तों के साथ त्योहार के इन दिनों को खास बनाना चाहते हैं, तो देश की इन 6 चुनिंदा जगहों का रुख कर सकते हैं।
1. कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव और देव संस्कृति का अद्भुत संगम
यदि आप दशहरे के असली सांस्कृतिक और पारंपरिक रंग में रंगना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत घाटी में स्थित कुल्लू से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। जहां पूरे देश में विजयादशमी के दिन रावण दहन के साथ उत्सव का समापन होता है, वहीं कुल्लू के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में दशहरे से ही हफ्ते भर चलने वाले विश्व प्रसिद्ध 'कुल्लू दशहरा' का भव्य आगाज होता है। इस दौरान पूरी घाटी से लगभग 250 से 300 स्थानीय देवी-देवताओं की पालकियों को सजाकर भगवान रघुनाथ जी के मिलन के लिए लाया जाता है। लोक संगीत, पारंपारिक नाटी नृत्य और स्थानीय हिमाचली व्यंजनों की महक से पूरा इलाका खिल उठता है। कुल्लू पहुंचने के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली से वोल्वो बस या निजी टैक्सी के जरिए शानदार रोड ट्रिप का आनंद लिया जा सकता है।
2. मैसूर (कर्नाटक): 1 लाख बल्बों की रोशनी से जगमगाता मैसूर पैलेस और जंबो सवारी
दक्षिण भारत की शाही विरासत और दशहरे की भव्यता का जीवंत अनुभव करने के लिए मैसूर (मैसूरु) देश का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है। कर्नाटक सरकार द्वारा आयोजित किया जाने वाला 'मैसूर दसरा' देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस दौरान ऐतिहासिक अंबा विलास पैलेस (मैसूर पैलेस) को लगभग एक लाख एलईडी लाइटों से सजाया जाता है, जिसका रात का दृश्य देखकर आंखें चौंधिया जाती हैं। दशहरे के दिन निकाली जाने वाली पारंपरिक 'जंबो सवारी' में सजे-धजे हाथियों के ऊपर 750 किलोग्राम सोने के हौदे में विराजमान देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा का जुलूस निकलता है। बेंगलुरु से मात्र तीन घंटे की दूरी पर स्थित मैसूर फ्लाइट, ट्रेन और एक्सप्रेसवे के जरिए बहुत आसानी से पहुंचा जा सकता है।
3. वाराणसी (उत्तर प्रदेश): गंगा आरती, रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला और घाटों की रौनक
यदि आपको अध्यात्म, प्राचीन संस्कृति और गंगा के शांत प्रवाह से सुकून मिलता है, तो दशहरे के लॉन्ग वीकेंड पर काशी यानी वाराणसी की यात्रा एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी। नवरात्रि के बाद दशहरे के मौके पर बनारस के 84 घाटों पर दीपों की भव्य रोशनी और दशाश्वमेध घाट की महाआरती का दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। वाराणसी के पास स्थित रामनगर में 200 से अधिक वर्षों पुरानी परंपरा के तहत खुले आसमान के नीचे बिना किसी माइक के मंचित होने वाली पारंपरिक रामलीला को देखने देश-दुनिया से शोधार्थी और पर्यटक आते हैं। अस्सी घाट की सुबह की आरती, नौका विहार और विश्वनाथ कॉरिडोर के दर्शन के साथ-साथ बनारसी चाट, लस्सी और ठंडाई का स्वाद आपके वीकेंड को यादगार बना देगा।
4. ऋषिकेश (उत्तराखंड): एडवेंचर स्पोर्ट्स, कैम्पिंग और गंगा किनारे मानसिक शांति
जो युवा और पर्यटक छुट्टियों में एड्रेनालिन रश यानी रोमांचक खेलों का आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए उत्तराखंड की योग नगरी ऋषिकेश पहली पसंद है। अक्टूबर के महीने में गंगा का जलस्तर सामान्य और पानी पूरी तरह शीशे जैसा साफ हो जाता है, जिससे व्हाइट वाटर रिवर राफ्टिंग का सीजन पूरे शबाब पर रहता है। 4 दिन के इस ब्रेक में आप शिवपुरी में रिवर-साइड लग्जरी टेंट में कैम्पिंग कर सकते हैं, बोनफायर का लुत्फ उठा सकते हैं और बंजी जंपिंग, फ्लाइंग फॉक्स व क्लिफ जंपिंग जैसे साहसिक खेलों में हाथ आजमा सकते हैं। शाम के समय त्रिवेणी घाट की गंगा आरती में शामिल होना और लक्ष्मण झूला के आसपास के सुकून भरे कैफे में वक्त बिताना मन को भीतर तक शांत कर देता है।
5. जयपुर (राजस्थान): पिंक सिटी की शाही हवेलियां, किले और पारंपरिक उत्सव
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए जयपुर एक बेहतरीन और सुगम ड्राइव-इन डेस्टिनेशन है। अक्टूबर की सुहावनी धूप में आमेर का किला, जयगढ़, नाहरगढ़, हवा महल और सिटी पैलेस का दीदार करना बेहद सुखद लगता है। दशहरे के मौके पर विद्याधर नगर स्टेडियम में आयोजित होने वाला भव्य रावण दहन और सांस्कृतिक मेले शहर का मुख्य आकर्षण होते हैं। इसके अलावा शाम के वक्त चोखी ढाणी जाकर पारंपरिक राजस्थानी थाली (दाल-बाटी-चूरमा) का स्वाद लेना, कठपुतली डांस देखना और जोहरी बाजार व बापू बाजार से जयपुरी रजाई, बंधेज साड़ियों और हस्तशिल्प की शॉपिंग करना आपके ट्रिप में चार चांद लगा देगा।
6. मुक्तेश्वर (उत्तराखंड): भीड़भाड़ से दूर हिमालय की बर्फीली चोटियों का नैनसुख
यदि आप त्योहारों के शोरगुल और भीड़ से दूर किसी शांत, एकांत और प्रकृति की गोद में बसे हिल स्टेशन पर वक्त बिताना चाहते हैं, तो नैनीताल जिले का मुक्तेश्वर सबसे सटीक ठिकाना है। समुद्र तल से 2,171 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुक्तेश्वर से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी हिमालय की विशाल बर्फीली चोटियों का 180-डिग्री विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यहां के सेब, खुबानी और आड़ू के बाग, ब्रिटिश काल का मुक्तेश्वर धाम मंदिर और 'चौली की जाली' से दिखने वाली गहरी घाटियां फोटोग्राफी और ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए स्वर्ग समान हैं। मुक्तेश्वर में कमर्शियल भीड़भाड़ बेहद कम रहती है, जिससे आप चीड़ और बांज के जंगलों के बीच शांति से अपनी छुट्टियां बिता सकते हैं।
टिकट और होटल बुकिंग में न करें देरी, ऐन वक्त पर बढ़ सकते हैं दाम
दशहरे और दीवाली के बीच का यह समय भारत में 'पीक टूरिज्म सीजन' माना जाता है। चूंकि इस बार 4 दिनों का लंबा वीकेंड बन रहा है, इसलिए कुल्लू, मैसूर और ऋषिकेश जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर होटलों, रिसॉर्ट्स और होमस्टे की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। यदि आप ऐन वक्त पर बुकिंग करेंगे, तो फ्लाइट और ट्रेन टिकट मिलने में भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है और होटलों के टैरिफ भी 40 से 50 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं। इसलिए अपने बजट, परिवार की प्राथमिकताओं और यात्रा के साधन का आकलन कर तुरंत अपनी बुकिंग्स सुरक्षित कर लें, ताकि त्योहार की इन छुट्टियों का आनंद बिना किसी तनाव और परेशानी के उठाया जा सके।