HDFC Bank के ग्राहकों को बड़ा तोहफा: रेपो रेट के दबाव के बीच सस्ता हुआ कर्ज, MCLR दरों में 15 bps तक की कटौती

HDFC Bank के ग्राहकों को बड़ा तोहफा: रेपो रेट के दबाव के बीच सस्ता हुआ कर्ज, MCLR दरों में 15 bps तक की कटौती

बैंकिंग सेक्टर में फंड की बढ़ती लागत और रिजर्व बैंक की कड़ी मौद्रिक नीतियों के बीच देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर लेंडर एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने अपने लाखों कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। जहां अन्य बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, वहीं एचडीएफसी बैंक ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए अपनी सभी अवधियों (Tenures) के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी एमसीएलआर (MCLR) में 5 से 15 बेसिस प्वाइंट्स (0.05% से 0.15%) तक की कटौती का ऐलान किया है। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नई दरें 7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई हैं। इस फैसले के बाद बैंक से जुड़े पर्सनल लोन, ऑटो लोन और एमसीएलआर-लिंक्ड होम लोन ग्राहकों की उधारी लागत में कमी आएगी।

1-वर्षीय MCLR घटकर 8.30% पर आई, देखें सभी टेन्योर की नई दरें

एचडीएफसी बैंक द्वारा संशोधित की गई नई एमसीएलआर दरें अब 7.75% से 8.55% के दायरे में आ गई हैं, जो पहले 7.90% से 8.60% तक थीं। सबसे ज्यादा 15 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती 1 महीने की अवधि वाली एमसीएलआर में की गई है, जो 7.90% से गिरकर 7.75% पर आ गई है। वहीं सबसे अहम और रिटेल लोन्स का मुख्य आधार मानी जाने वाली 1 साल की एमसीएलआर को 8.35% से घटाकर 8.30% कर दिया गया है।

विभिन्न अवधियों की नई और पुरानी दरें इस प्रकार हैं:

  • ओवरनाइट (Overnight): 7.90% से घटकर 7.80% (10 bps की कटौती)

  • 1 महीना (1 Month): 7.90% से घटकर 7.75% (15 bps की कटौती)

  • 3 महीने (3 Months): 8.05% से घटकर 7.95% (10 bps की कटौती)

  • 6 महीने (6 Months): 8.25% से घटकर 8.15% (10 bps की कटौती)

  • 1 वर्ष (1 Year): 8.35% से घटकर 8.30% (5 bps की कटौती)

  • 2 वर्ष (2 Years): 8.45% से घटकर 8.40% (5 bps की कटौती)

  • 3 वर्ष (3 Years): 8.60% से घटकर 8.55% (5 bps की कटौती)

लोन ईएमआई (EMI) पर कब और कैसे दिखाई देगा इस कटौती का असर?

एचडीएफसी बैंक के इस कदम से उन सभी मौजूदा कर्जदारों को फायदा मिलेगा जिनका लोन फ्लोटिंग एमसीएलआर व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा है। हालांकि, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि एमसीएलआर में कटौती का लाभ तुरंत अगले दिन से ईएमआई में नहीं जुड़ता। बैंकिंग नियमों के अनुसार हर एमसीएलआर लोन का एक 'रीसेट पीरियड' (सालाना या छमाही) होता है। जब आपके लोन की रीसेट डेट आएगी, उस दिन बैंक की चालू एमसीएलआर दर आपके लोन अकाउंट पर लागू कर दी जाएगी। इसके बाद या तो आपकी मासिक ईएमआई की रकम घट जाएगी या फिर ईएमआई समान रखते हुए लोन की अवधि (Tenure) कम कर दी जाएगी।

नए होम लोन ग्राहक ध्यान दें: EBLR और MCLR के अंतर को समझें

इस राहत भरी खबर के बीच नए होम लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए तकनीकी अंतर को समझना बेहद आवश्यक है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमानुसार 1 अक्टूबर 2019 के बाद लिए गए अधिकांश नए रिटेल होम लोन्स एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR/Repo-Linked) से जुड़े होते हैं। यदि आपका लोन सीधे आरबीआई के पॉलिसी रेपो रेट से लिंक्ड है, तो यह एमसीएलआर कटौती सीधे उस पर लागू नहीं होगी। लेकिन वे ग्राहक जिनका होम लोन 2016 से 2019 के बीच स्वीकृत हुआ था, या जिन्होंने ऑटो लोन, बिजनेस लोन और पर्सनल लोन एमसीएलआर आधारित कॉन्ट्रैक्ट पर लिया हुआ है, उन्हें इस दर कटौती का सीधा और बड़ा लाभ मिलेगा।

फेस्टिव सीजन में क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने और ग्राहकों को आकर्षित करने की रणनीति

वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी सीजन के दौरान रिटेल लोन, ऑटोमोबाइल और टिकाऊ उपभोक्ता सामानों की खरीद चरम पर होती है। ऐसे समय में उधारी दरों को प्रतिस्पर्धी बनाकर एचडीएफसी बैंक बाजार में अपनी हिस्सेदारी और क्रेडिट ग्रोथ को तेजी से बढ़ाना चाहता है। बैंक का यह कदम अन्य प्रतिस्पर्धी निजी व सार्वजनिक बैंकों (जैसे ICICI Bank, Axis Bank और SBI) पर भी अपनी लेंडिंग दरों को लेकर दबाव बना सकता है। अगर आप भी त्योहारी सीजन में कोई नया वाहन या पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो एचडीएफसी बैंक की यह संशोधित दरें आपके लोन की कुल लागत को कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं।