ईरान पर बड़े सैन्य हमले की तैयारी तेज: पेंटागन ने CENTCOM को दिए निर्देश, कैंप डेविड में घंटों चली हाई-लेवल बैठक; क्या फिर भड़केगा महायुद्ध?
मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी तनाव अब एक ऐसे नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है जहां किसी भी वक्त एक और भीषण सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US CENTCOM) को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष सैन्य हमले और संभावित 'मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस' की सभी तैयारियां अंतिम रूप से पूरी करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। रक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना, नौसेना और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में उच्चतम युद्धक तत्परता (Combat Readiness) की स्थिति में रखा गया है। हालांकि व्हाइट हाउस की तरफ से अभी तक किसी निश्चित तारीख या अंतिम हमले का आधिकारिक आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सैन्य स्तर पर जिस तेजी से मोर्चेबंदी की जा रही है, उसने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक और आर्थिक हलकों में भारी खलबली मचा दी है।
कैंप डेविड में घंटों चली शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की गुप्त बैठक
इस संभावित सैन्य कार्रवाई की रणनीति को आकार देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के मैरीलैंड स्थित ऐतिहासिक रिट्रीट 'कैंप डेविड' में राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की एक बेहद गोपनीय और मैराथन उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा प्रमुख और संयुक्त खुफिया एजेंसियों के आला अधिकारी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु ठिकानों, ऊर्जा व तेल बुनियादी ढांचे और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स को लक्षित करने के विभिन्न रणनीतिक विकल्पों पर विचार करना था। अमेरिकी नेतृत्व इस बात का बारीकी से आकलन कर रहा है कि यदि ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जाती है, तो उसके सामरिक परिणाम और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाला असर किस हद तक नियंत्रित रखा जा सकेगा।
ट्रंप-नेतन्याहू संवाद और इजरायल के साथ संयुक्त सैन्य मोर्चेबंदी
इस पूरे घटनाक्रम में इजरायल की भूमिका सबसे अहम धुरी बनकर उभरी है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कुछ ही दिनों के भीतर दो बार लंबी टेलीफोनिक वार्ता हुई है। इजरायली सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि कोई नया सैन्य अभियान शुरू होता है, तो वह केवल अमेरिका की तरफ से नहीं बल्कि अमेरिका और इजरायल का एक साझा व समन्वित संयुक्त हमला (Joint Military Strike) हो सकता है। तेल अवीव की तरफ से लगातार यह आशंका जताई जा रही है कि अपनी गिरती सैन्य स्थिति और रणनीतिक नुकसान को देखते हुए तेहरान किसी भी समय पहला हमला (Pre-emptive Strike) करने की कोशिश कर सकता है, जिसके जवाब में इजरायल और अमेरिकी सेना को संयुक्त रूप से पहले ही ईरानी वायु रक्षा तंत्र (Air Defence Systems) को नेस्तनाबूद करना पड़ सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और 100 डॉलर पार क्रूड ऑयल: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
सैन्य टकराव की इस नई सुगबुगाहट का सबसे तात्कालिक असर दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक गलियारे 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। होर्मुज के रास्ते दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। हाल के दिनों में तेल टैंकरों पर हुए संदिग्ध हमलों और ईरानी धमकियों के बाद अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की तैनाती को 'स्टील की दीवार' करार दिया है। युद्ध के गहराते बादलों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। अर्थशास्त्रियों की चिंता है कि यदि ईरान के तेल शोधक कारखानों या निर्यात टर्मिनलों पर हमला होता है, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे भारत सहित सभी प्रमुख तेल आयातक एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का नया चक्र शुरू हो सकता है।
घरेलू राजनीति और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का कूटनीतिक गणित
सैन्य तैयारियों के बीच वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में इस बात पर भी तीखी बहस चल रही है कि क्या यह सैन्य कार्रवाई नवंबर के शुरुआती सप्ताह में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से पहले की जानी चाहिए या बाद में। प्रशासन के एक खेमे का तर्क है कि चुनाव से पहले ईरान के परमाणु खतरे और आक्रामक रुख पर निर्णायक प्रहार करने से एक मजबूत संदेश जाएगा। वहीं दूसरी ओर एक बड़ा कूटनीतिक धड़ा यह चेतावनी दे रहा है कि यदि ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल या खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, तो अमेरिका एक लंबे और अनिर्णायक युद्ध में उलझ सकता है, जिसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पेंटागन द्वारा सेंटकॉम को दिए गए निर्देश यह साबित करते हैं कि बंदूकें लोड हो चुकी हैं और अब सारा दारोमदार व्हाइट हाउस से मिलने वाले अंतिम राजनीतिक आदेश पर टिका हुआ है।