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March 24 2026 03:52 am

ईरान पर मंडराया युद्ध का खतरा ब्रिटेन ने अमेरिका को दी अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की इजाजत, ट्रम्प की चेतावनी

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में तनाव की चिंगारी अब भीषण आग का रूप लेती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया चेतावनियों के बाद ब्रिटेन (UK) ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की हरी झंडी दे दी है। इस फैसले ने न केवल खाड़ी देशों में खलबली मचा दी है, बल्कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है।

ट्रम्प की सख्त चेतावनी और ब्रिटेन का साथ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पद संभालते ही ईरान के प्रति बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों या क्षेत्रीय हस्तक्षेप को कम नहीं किया, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रम्प की इसी 'मैक्सिमम प्रेशर' रणनीति के तहत ब्रिटेन ने अपने द्वीपीय और रणनीतिक सैन्य अड्डों (जैसे डिएगो गार्सिया और साइप्रस) को अमेरिकी वायु सेना और नौसेना के लिए खोलने का निर्णय लिया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना दुनिया का सबसे खतरनाक जोन

ब्रिटेन के इस कदम का सीधा असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ने वाला है। यह जलमार्ग दुनिया के कच्चे तेल की सप्लाई का मुख्य केंद्र है। ईरान पहले ही धमकी दे चुका है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन के अड्डों का इस्तेमाल कर अमेरिका ईरान के मिसाइल ठिकानों और परमाणु संयंत्रों को आसानी से निशाना बना सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में भीषण युद्ध छिड़ सकता है।

ब्रिटिश संसद में फैसले पर मचा घमासान

ब्रिटेन के इस फैसले ने वहां की आंतरिक राजनीति में भी उबाल ला दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि ब्रिटेन को बिना सोचे-समझे अमेरिका के युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे ब्रिटिश हितों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि, ऋषि सुनक प्रशासन (या वर्तमान नेतृत्व) का तर्क है कि वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्ग (Maritime Routes) को सुरक्षित रखने के लिए ईरान की आक्रामकता को रोकना अनिवार्य है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर पड़ेगा असर

यदि ब्रिटेन और अमेरिका ईरान पर हमला करते हैं, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे भारत जैसे आयात निर्भर देशों में महंगाई का संकट पैदा हो सकता है। फिलहाल खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय समुदाय और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस 'घेराबंदी' का जवाब किस तरह देता है।