भाग्य जगा देते हैं ये चिन्ह,क्या आप जानते हैं कान्हा के चरणों में ध्वज और अंकुश का असली मतलब?

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News India Live, Digital Desk: हम जब भी मंदिर जाते हैं या घर में लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं, तो अनायास ही हमारा सिर उनके चरणों में झुक जाता है। इन चरणों को 'चरण कमल' इसलिए कहा जाता है क्योंकि जैसे कमल कीचड़ में रहकर भी खुद को बेदाग और सुंदर रखता है, वैसे ही प्रभु के पैर इस मायावी दुनिया में रहकर भी हम सबको संसार के दलदल से बाहर निकालते हैं।

चलिए, आज उन कुछ खास चिन्हों की बात करते हैं जिन्हें कृष्ण के पैरों में देखने मात्र से ही इंसान के भीतर सकारात्मक ऊर्जा भरने लगती है।

1. अंकुश का निशान (The Goad)
हमारे शास्त्रों के मुताबिक, इंसान का मन एक मदमस्त और चंचल हाथी की तरह है, जिसे वश में करना बहुत मुश्किल है। श्री कृष्ण के दाहिने पैर के नीचे जो अंकुश का निशान है, वह इसी बात का प्रतीक है कि भगवान के चरणों की शरण लेने से हमारे मन रूपी हाथी पर लगाम लग जाती है। अगर आपका मन बहुत भटकता है, तो इस चिन्ह का ध्यान करना बहुत शुभ माना जाता है।

2. ध्वज यानी झंडा (The Flag)
भगवान के चरणों में ध्वज का होना 'विजय' का प्रतीक है। इसका आध्यात्मिक रहस्य यह है कि जो व्यक्ति कृष्ण की शरण में जाता है, उसे भय (डर) से मुक्ति मिलती है और उसे अपने भीतर की बुराइयों पर विजय हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।

3. वज्र (The Thunderbolt)
वज्र कठोर होता है और पुरानी कथाओं के मुताबिक यह पापों का नाश करता है। कान्हा के पैर में बना वज्र का निशान इस बात का संकेत है कि प्रभु का स्मरण हमारे जीवन के पुराने संचित पापों को उसी तरह तोड़ देता है, जैसे वज्र बड़े-बड़े पहाड़ों को नष्ट कर देता है।

4. कमल और मछली (Lotus and Fish)
पैर में बना कमल का निशान शांति और शीतलता देता है। वहीं मछली का निशान चंचलता और निरंतरता का प्रतीक है। इनका गहरा राज यह है कि जैसे मछली पानी के बिना नहीं रह सकती, वैसे ही एक सच्चा भक्त भगवान के चरणों के बिना नहीं रह पाता। मछली का चिन्ह हमारे मन को एक जगह स्थिर करने में मदद करता है।

क्यों कहते हैं इन्हें भाग्य बदलने वाला?
असल में ये चिन्ह सिर्फ रेखाएँ नहीं, बल्कि मेडिटेशन (ध्यान) के बिंदु हैं। संत कहते हैं कि जब आप कृष्ण के चरणों के इन 19 निशानों का मन में ध्यान करते हैं, तो आपकी बुद्धि सात्विक होने लगती है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इंसान लालच, मोह और गुस्से के जाल से बाहर निकल जाता है।

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर सुकून की तलाश में इधर-बधर भागते हैं, जबकि सुकून का वो खज़ाना तो कान्हा के उन्हीं कोमल चरणों में छिपा है। तो अगली बार जब आप मुरली मनोहर की मूर्ति देखें, तो एक पल के लिए उनके चरणों में बने इन प्रतीकों को महसूस ज़रूर कीजिएगा। कहते हैं कि जिसकी नज़रों में कन्हाई के चरणों की धूल बस गई, उसका बेड़ा पार होना तय है।