हवन की अग्नि में छिपे हैं ये 7 देवी रूप, अध्यात्म और विज्ञान का वो संगम जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे
News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म में हम जब भी कोई पूजा या शुभ काम करते हैं, तो 'दीपक' जलाना या 'हवन' करना उसका सबसे अहम हिस्सा होता है। हम आग जलाते हैं, उसमें आहुति डालते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि वह आग यानी अग्नि देव उसे ग्रहण कैसे करते हैं?
पुराणों और उपनिषदों (जैसे मुंडक उपनिषद) में बताया गया है कि अग्नि देव की सात 'जिह्वाएँ' यानी जीभ होती हैं। ये सात जीभ दरअसल अग्नि की सात अलग-अलग शक्तियाँ या सात देवियाँ हैं। तो चलिए आज इस रहस्य से परदा उठाते हैं और जानते हैं कि आपकी दी हुई आहुति को स्वर्ग तक पहुँचाने वाली ये सात लपटें आखिर कौन हैं।
1. काली (Karali or Kali)
यह अग्नि की पहली जीभ मानी जाती है। इसका संबंध संहार और बदलाव से है। जब अग्नि सब कुछ जलाकर राख कर देती है, तो वह 'काली' रूप में होती है। यहाँ 'काली' का मतलब सिर्फ रंग से नहीं, बल्कि उस भयानक वेग से है जो पुराने को खत्म कर नए के लिए रास्ता बनाता है।
2. कराली (Karali)
यह दूसरी जीभ है, जो बहुत ही भयंकर और शक्तिशाली मानी जाती है। यह लपटों के उस रूप को दर्शाती है जिसे काबू करना मुश्किल होता है। तांत्रिक और विशिष्ट पूजाओं में कराली का आह्वान बहुत महत्वपूर्ण होता है।
3. मनोजवा (Manojava)
मनोजवा का अर्थ है 'मन के वेग के समान चलने वाली'। यह अग्नि की वह जीभ है जो प्रकाश की गति से भी तेज मानी जाती है। माना जाता है कि आपकी जो श्रद्धा और विचार हैं, उन्हें पलक झपकते ही देवी-देवताओं तक पहुँचाने का काम यही शक्ति करती है।
4. सुलोहिता (Sulohita)
जैसा कि नाम से ही साफ़ है, 'लोहिता' यानी लाल रंग वाली। यह सुंदर लाल रंग की अग्नि होती है। यह सौभाग्य और ऊर्जा का प्रतीक है। जो भक्त अपने घर की खुशहाली के लिए यज्ञ करते हैं, सुलोहिता ही उनकी प्रार्थनाओं को स्वीकार करती है।
5. सुधूम्रवर्णा (Sudhumravarna)
अग्नि से निकलने वाले सुंदर बैंगनी या गहरे धुएँ के रंग वाली लपट को सुधूम्रवर्णा कहते हैं। यह ध्यान और योग से जुड़ी मानी जाती है। इसका संबंध इंसान की आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति से है।
6. स्फुलिंगिनी (Sphulingini)
अग्नि से जब चिनगारियाँ फूटती हैं, तो उसे स्फुलिंगिनी कहा जाता है। यह बिजली के समान चमकदार और चंचल होती है। यह शक्ति बुराई का नाश करने और बाधाओं को चिनगारियों की तरह उड़ा देने के लिए जानी जाती है।
7. विश्वरुचि (Vishwaruchi)
यह सातवीं और सबसे पवित्र जीभ मानी जाती है। 'विश्वरुचि' का अर्थ है जिसमें सारा संसार समाहित हो। यह अग्नि का वह सुनहरी रूप है जो हर जीव और हर चीज़ को प्रकाशित करता है। सात्विक यज्ञों में इस रूप की पूजा प्रमुख होती है।
ये रहस्य क्यों ज़रूरी है?
जब हम हवन करते हैं और 'स्वाहा' बोलते हैं, तो दरअसल हम इन्हीं सात शक्तियों के जरिए देवताओं को भोजन अर्पण कर रहे होते हैं। पुराने ऋषि-मुनियों का मानना था कि अग्नि की लपटों को समझना ही असल में ईश्वर को समझना है। यह अग्नि ही है जो धरती के इंसान और स्वर्ग के भगवान के बीच एक सेतु (Bridge) का काम करती है।
अगली बार जब आप दीया जलाएँ या हवन में बैठें, तो बस अग्नि की इन सात लपटों का ध्यान करें। आपकी पूजा सिर्फ एक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक गहरा अनुभव बन जाएगी।
उम्मीद है कि अग्नि देव से जुड़ा यह छोटा सा लेकिन अद्भुत रहस्य आपके ज्ञान के दीप को ज़रूर रोशन करेगा!