लोहड़ी 2026 की सही तारीख को लेकर न हों परेशान, 13 या 14 जनवरी? यहाँ है पंचांग की पक्की जानकारी

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News India Live, Digital Desk : साल की शुरुआत हो चुकी है और अब 2026 की ठंडी हवाओं के बीच सबकी निगाहें टिकी हैं पंजाबियों के सबसे मशहूर और पसंदीदा त्यौहार 'लोहड़ी' पर। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी लोगों के बीच एक छोटी सी उलझन बनी हुई है आखिर लोहड़ी कब मनाई जाएगी? 13 जनवरी को या फिर 14 जनवरी को?

अक्सर हम कंफ्यूज हो जाते हैं क्योंकि त्यौहारों की तारीखें कई बार पंचांग के हिसाब से बदलती रहती हैं। चलिए, आज इसे बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं ताकि आप अपनी ढोल-नगाड़ों और भंगड़ा की तैयारी समय पर कर सकें।

क्या है पंचांग का गणित? (Lohri Date Confusion)

वैसे तो सदियों से लोहड़ी 13 जनवरी को ही मनाई जाती रही है और उसके अगले दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। लेकिन असली फैसला सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से होता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही है।

परंपरागत रूप से लोहड़ी मकर संक्रांति से ठीक एक शाम पहले मनाई जाती है। इसलिए इस बार लोहड़ी 13 जनवरी, 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। कुछ जगहों पर उदयातिथि और नक्षत्रों की वजह से 14 की बात भी उठ सकती है, लेकिन ज्यादातर विद्वानों और जानकारों का कहना है कि 13 तारीख की रात ही अग्नि जलाना और त्यौहार मनाना सबसे उत्तम होगा।

लोहड़ी का शुभ मुहूर्त (Lohri 2026 Puja Muhurat)

त्यौहार तो खुशियों का होता है, लेकिन अगर सही समय पर पूजन और परिक्रमा की जाए, तो सुख-शांति बढ़ती है।

  • लोहड़ी संक्रांति का क्षण: 14 जनवरी की सुबह सूर्य का गोचर होगा।
  • अग्नि प्रज्वलन का समय: 13 जनवरी की शाम को गोधूलि बेला या शाम ढलने के बाद (लगभग 5:45 के बाद) आप पवित्र अग्नि जला सकते हैं। इस समय परिवार के साथ मिलकर आग के चारों ओर 'आदर आवे दिल दरिद्र जावे' का नारा लगाना सबसे शुभ माना जाता है।

क्यों है यह लोहड़ी खास?

2026 की यह लोहड़ी इसलिए भी खास है क्योंकि कई सालों के बाद त्यौहार का मुख्य दिन मंगलवार को पड़ रहा है। जिनकी पहली लोहड़ी (चाहे वो शादी हो या बच्चे का जन्म) है, उनके लिए 13 तारीख की शाम का वक्त काफी शुभ है। घर की पहली लोहड़ी में तिलक और आशीर्वाद का बहुत महत्व होता है, तो अभी से रिश्तेदारों को न्योता देना शुरू कर दीजिये।

क्या है महत्व और परंपरा?

दुल्ला भट्टी की कहानियां हों या तिल-गुड़ की मिठास, लोहड़ी का त्यौहार हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। किसान इस दिन अपनी फसलों के कटने और आने वाली सुख-समृद्धि के लिए प्रकृति का आभार जताते हैं। आग में तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मक्का की खील डालना भगवान को धन्यवाद कहने का तरीका है।

तो बस, तैयारी पूरी रखिये! मूंगफली-पॉपकॉर्न इकट्ठा कर लीजिये और 13 जनवरी की शाम को ढोल की थाप पर भांगड़ा डालने के लिए तैयार रहिये। हमारी ओर से आपको लोहड़ी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!