Ram Rahim Acquitted : पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम बरी, हाई कोर्ट ने पलटा CBI कोर्ट का फैसला

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News India Live, Digital Desk: शनिवार (7 मार्च 2026) को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2002 के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड से बरी कर दिया है। जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की बेंच ने सबूतों के अभाव और कानूनी बारीकियों को आधार बनाते हुए पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के 2019 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

22 साल पुराना मामला: क्या था पूरा विवाद?

यह मामला साल 2002 का है, जब सिरसा के निडर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार 'पूरा सच' में एक गुमनाम पत्र छापा था। इस पत्र में डेरा की साध्वियों के साथ हो रहे यौन शोषण का खुलासा किया गया था। इस खबर के प्रकाशित होने के कुछ समय बाद, अक्टूबर 2002 में छत्रपति पर उनके घर के बाहर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

CBI कोर्ट बनाम हाई कोर्ट: फैसले में क्या बदला?

CBI कोर्ट का फैसला (2019): जनवरी 2019 में विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य (निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह और कृष्ण लाल) को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया था और उम्रकैद की सजा दी थी।

हाई कोर्ट का ताजा फैसला (2026): हाई कोर्ट ने राम रहीम की अपील स्वीकार करते हुए उनकी सजा को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की सजा को लेकर अलग रुख अपनाया है (अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखी गई है)। विस्तृत आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि राम रहीम के खिलाफ कौन से सबूत कमजोर पाए गए।

बरी होने के बावजूद जेल में ही रहेंगे राम रहीम

भले ही पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम को बड़ी राहत मिल गई हो, लेकिन वे अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।

साध्वी यौन शोषण मामला: राम रहीम साल 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी 20 साल की सजा काट रहे हैं।

रंजीत सिंह मर्डर केस: इस मामले में भी उन्हें पहले ही हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी है। फिलहाल, यौन शोषण के मामले में सजा बरकरार रहने के कारण उन्हें जेल में ही रहना होगा।

पीड़ित परिवार का अगला कदम: सुप्रीम कोर्ट की तैयारी

रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस फैसले पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि यह उनके परिवार के लिए एक बड़ा झटका है और वे इंसाफ के लिए अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। डेरा अनुयायियों के बीच इस फैसले के बाद खुशी की लहर है, लेकिन सुरक्षा कारणों से सिरसा और आसपास के इलाकों में प्रशासन अलर्ट पर है।