मौत से पहले शरीर में होते हैं ये 6 बदलाव, गरुड़ पुराण के वे रहस्य जो शायद ही कोई आपको बताएगा
News India Live, Digital Desk: कहते हैं कि जन्म और मृत्यु जीवन का वह शाश्वत सत्य है जिससे आज तक कोई बच नहीं पाया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब किसी का समय पूरा होने वाला होता है, तो क्या उसे पहले से कोई आभास होता है? हमारी सनातनी परंपरा और खास तौर पर 'गरुड़ पुराण' में इस बारे में विस्तार से बताया गया है। अक्सर हम इन चीजों को महज़ वहम मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन इन बातों के पीछे गहरा अध्यात्म और कुछ खास संकेत छिपे होते हैं जिन्हें यमराज के 'दूत' या संदेशवाहक माना गया है।
आज हम उन 6 रहस्यमयी संकेतों के बारे में बात करेंगे, जिनका जिक्र गरुड़ पुराण में बहुत गंभीरता से किया गया है।
1. अपनी ही छाया का साथ छोड़ देना
इंसान की परछाईं उसके जीवित होने का प्रमाण है। गरुड़ पुराण कहता है कि जब व्यक्ति का अंत समय करीब आता है, तो उसे पानी, तेल या आईने में अपनी ही परछाईं दिखना बंद हो जाती है। या फिर उसे अपनी छाया विकृत (बिगड़ी हुई) महसूस होने लगती है। यह इस बात का संकेत है कि अब आत्मा का इस नश्वर शरीर से नाता टूटने वाला है।
2. इंद्रियों का सुस्त हो जाना
मौत से कुछ समय पहले, इंसान की सुनने, सूंघने और चखने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। अक्सर देखा गया है कि व्यक्ति को अपने आस-पास की सुगंध या बदबू का अहसास नहीं होता। यह शारीरिक तंत्र के धीरे-धीरे बंद होने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे शास्त्रों में समय के पूर्ण होने का इशारा माना गया है।
3. नाक की नोक न दिखना
यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन कहा जाता है कि जब अंतिम क्षण पास होते हैं, तो आँखों की रोशनी इस कदर कमजोर हो जाती है या ध्यान इतना भटक जाता है कि इंसान को अपनी ही नाक की नोक दिखनी बंद हो जाती है। यह एकाग्रता के खत्म होने का प्राथमिक संकेत माना जाता है।
4. सुनाई देना 'सन्नाटे की गूंज'
सामान्य रूप से जब हम कान बंद करते हैं, तो हमें भीतर एक हल्की गूँज सुनाई देती है। लेकिन गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस व्यक्ति का अंत करीब होता है, उसे कानों में होने वाली वह स्वाभाविक ध्वनि सुनाई देनी बंद हो जाती है। उसे सिर्फ सन्नाटा महसूस होने लगता है।
5. चाँद-सूरज का अलग रंग में दिखना
जब शरीर के तत्व बिगड़ने लगते हैं, तो इंसान को आग, सूरज और चाँद का रंग भी बदला हुआ दिखने लगता है। कई बार सूरज उसे धुंधला या काला दिखाई देने लगता है, जबकि चाँद उसे कटा हुआ या पीला नजर आता है। यह असल में हमारी नजर के दोष नहीं, बल्कि रवानगी के वक्त की मानसिक अवस्था होती है।
6. पूर्वजों की उपस्थिति का अहसास
अंतिम समय में व्यक्ति को अपने उन रिश्तेदारों या पूर्वजों के चेहरे नजर आने लगते हैं, जो बहुत पहले इस दुनिया को छोड़ चुके हैं। उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कोई उसे बुला रहा है या उसके आसपास ही मौजूद है। यह संकेत आत्मा को अगले सफर के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का माना जाता है।