गाँव बना छावनी, अतुल प्रधान को रोका, रूबी हत्याकांड के बाद मेरठ के इस गांव में सन्नाटा क्यों है?

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News India Live, Digital Desk :  कभी-कभी कुछ खबरें ऐसी आती हैं जिन्हें लिखते हुए शब्द कम पड़ जाते हैं और कलेजा मुंह को आता है। मेरठ के पास एक छोटे से गांव में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा है, वो किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से भी ज्यादा डरावना और दुखद है। यहाँ बात हो रही है रूबी की, जिसका पहले अपहरण किया गया और फिर उसकी मौत की खबर ने सबको हिला कर रख दिया।

आज उस गांव की हालत ऐसी है कि वहां घर-घर में मातम है, लेकिन बाहर की दुनिया से वो गांव पूरी तरह कट गया है। चलिए, समझते हैं कि आखिर वहां हुआ क्या और अभी क्या हालात हैं।

गाँव या छावनी? (Village Turned Into Cantonment)

जैसे ही रूबी की मौत की खबर पुख्ता हुई, पुलिस प्रशासन ने गांव को एक 'छावनी' में तब्दील कर दिया। गांव के हर कोने पर भारी संख्या में पीएसी और पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए हैं। अमूमन जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो डर होता है कि गुस्सा और आक्रोश कहीं बवाल का रूप न ले ले। इसी सुरक्षा के मद्देनजर गांव में बाहरी लोगों की एंट्री को काफी सीमित कर दिया गया है। गलियों में गूंजता हुआ सन्नाटा वहां के तनाव को साफ बयां कर रहा है।

बेबस मां और पुलिस की बैरिकेडिंग

रुबी की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। किसी भी मां के लिए उसकी बेटी के अपहरण और फिर मौत की खबर से बड़ा दुख क्या होगा? लेकिन दुख की इस घड़ी में जब अपने लोग और संवेदना जताने वाले नेता वहां पहुंचना चाहते हैं, तो प्रशासन उन्हें रोक रहा है।

इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के नेता और विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव जाने से रोक दिया। अतुल प्रधान रूबी के परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देना चाहते थे और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे। पुलिस का तर्क है कि नेता के वहां जाने से माहौल बिगड़ सकता है, जबकि स्थानीय लोगों और परिवार का कहना है कि उन्हें अब सहानुभूति की सबसे ज्यादा जरूरत है।

सुरक्षा के नाम पर सवाल?

पुलिस प्रशासन ने गांव की सीमाओं पर घेराबंदी कर दी है ताकि कोई बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप न हो सके। लेकिन सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जितनी चौकसी और फुर्ती पुलिस अब गांव की बैरिकेडिंग में दिखा रही है, काश उतनी ही सक्रियता अपहरण के बाद रूबी को ढूंढने में दिखाई होती? क्या वाकई सुरक्षा के नाम पर गांव को कैद कर देना ही इकलौता समाधान है?

अब क्या है स्थिति?

गांव में अभी भी भारी तनाव है। परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। रूबी के हत्यारों को सख्त सजा देने की मांग उठ रही है। इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। पुलिस के उच्चाधिकारी स्थिति को कंट्रोल करने में लगे हैं, लेकिन गांव वालों की आंखों में जो डर और गुस्सा है, वो सिर्फ पुलिस की तैनाती से खत्म नहीं होगा।

हम सब उम्मीद करते हैं कि रूबी के परिवार को जल्द न्याय मिले और पुलिस उस असली गुनहगार तक पहुंचे जिसकी वजह से एक और घर का चिराग बुझ गया।