एजेंसियों का छापा और दिल्ली की अदालत ,बंगाल सरकार ने चली एक बड़ी कानूनी चाल
News India Live, Digital Desk : बंगाल की राजनीति में 'शांति' और 'खामोशी' जैसे शब्द आजकल कम ही सुनाई देते हैं। ताज़ा मामला जुड़ा है ममता सरकार के लिए रणनीतियां तैयार करने वाली संस्था I-PAC और केंद्रीय एजेंसी ED (प्रवर्तन निदेशालय) के बीच मचे घमासान से। जैसे ही ED की टीमों ने आई-पैक से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी शुरू की, राज्य सरकार ने भी बिना देर किए दिल्ली का रुख किया और सुप्रीम कोर्ट में 'कैवियट' (Caveat) दाखिल कर दी।
क्या होता है ये 'कैवियट' का पेच?
कानूनी भाषा को अगर सीधे शब्दों में समझें, तो कैवियट एक तरह की पूर्व सूचना है। बंगाल सरकार का ये कदम ये कहता है कि "अगर इस मामले (आई-पैक छापा) में कोई भी याचिका आए या कोई भी एकतरफा फैसला सुनाया जाने वाला हो, तो पहले हमारी बात सुनी जाए।" अक्सर ऐसा तब होता है जब एक पक्ष को डर होता है कि बिना उन्हें सुने कोई ऐसा ऑर्डर न पास हो जाए जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ जाएं।
आखिर छापा पड़ा ही क्यों?
आई-पैक को भारत की सबसे बड़ी चुनावी रणनीतिकार कंपनियों में से एक माना जाता है। बंगाल में टीएमसी की जीत में इसकी बड़ी भूमिका रही है। ED की इस कार्रवाई के पीछे पैसे के लेनदेन और वित्तीय गड़बड़ियों (Money Laundering) के आरोप बताए जा रहे हैं। लेकिन बंगाल सरकार का तर्क है कि ये सिर्फ केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल है ताकि कामकाज में रुकावट पैदा की जा सके।
क्यों बढ़ा है तनाव?
2026 की रफ़्तार में जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, जांच एजेंसियों और राज्यों की लड़ाई मज़बूत होती दिख रही है। आई-पैक के ठिकानों पर कार्रवाई सिर्फ एक छापा नहीं है, इसे सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस के नर्वस सिस्टम पर वार की तरह देखा जा रहा है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने खुद आगे आकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी सुरक्षा के इंतज़ाम किए हैं।
एक मज़बूत सियासी संदेश...
ममता सरकार की इस फुर्ती से एक बात तो साफ़ है कि अब वो बचाव की जगह हमलावर होने को तैयार हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा पहले खटखटाकर ये साफ़ कर दिया है कि उन्हें किसी भी बड़ी एजेंसी के दुरुपयोग से लड़ना आता है। उधर ED का कहना है कि वे महज़ तथ्यों के आधार पर काम कर रहे हैं और जाँच पूरी होने तक कोई कयास न लगाए जाएं।
आगे क्या होने वाला है?
सुप्रीम कोर्ट में कैवियट फाइल होने के बाद अब गेंद देश की सबसे बड़ी अदालत के पाले में है। अब अगर ED या आई-पैक से जुड़ा कोई भी व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट जाता है, तो राज्य सरकार वहां पक्षकार के रूप में मौजूद रहेगी। दिल्ली और कोलकाता की ये 'कानूनी शतरंज' आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प मोड़ लेने वाली है।