सपने और हकीकत के बीच फंसी राजनीति हिजाब वाली प्रधानमंत्री पर मसूद बनाम ओवैसी

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News India Live, Digital Desk : अक्सर राजनीति में ऐसे बयान सामने आते हैं जो दूर तलक चर्चा बटोरते हैं। हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी का वह पुराना दावा फिर से सुर्ख़ियों में है जिसमें उन्होंने कहा था कि "एक दिन इस देश की प्रधानमंत्री हिजाब पहनने वाली कोई महिला बनेगी।" यह सुनकर जहाँ उनके समर्थकों को एक नया जोश मिला, वहीं विपक्षी और ख़ासकर कांग्रेस के गलियारों से इस पर तीखा रिएक्शन आया है। कांग्रेस के कद्दावर नेता इमरान मसूद ने ओवैसी के इस दावे को 'दिन में तारे देखने' जैसा बताया है।

आखिर मसूद ने ऐसा क्यों कहा?
इमरान मसूद ने बहुत ही बेबाकी से अपनी बात रखी। उनका कहना है कि जिस तरह का माहौल फिलहाल देश में है, वहां ऐसी बातें करना महज़ एक 'ख़्वाब' दिखाने जैसा है। मसूद के अनुसार, ओवैसी अपनी बातों से केवल लोगों को भावनाओं में बहका रहे हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही इशारा कर रही है। उनका इशारा साफ़ था—जो मुमकिन नहीं है, उस पर चर्चा करके महज़ लोगों को भ्रमित न किया जाए।

सियासी आरोप और 'बी टीम' का टैग
मसूद यहीं नहीं रुके। उन्होंने दबी जुबान में एक बार फिर वही पुरानी बात छेड़ दी कि ओवैसी के ऐसे बयान कहीं न कहीं बीजेपी को फायदा पहुँचाने वाले होते हैं। राजनीति में जब भी ध्रुवीकरण की बात आती है, कांग्रेस और अन्य दल अक्सर ओवैसी को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। इमरान मसूद का तर्क है कि जब देश के ज्वलंत मुद्दों पर बात होनी चाहिए, तब 'हिजाब' जैसे संवेदनशील विषय पर प्रधानमंत्री पद का दांव खेलना ओवैसी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

ओवैसी का पक्ष और वह विश्वास
दूसरी ओर, ओवैसी का रुख हमेशा से मज़बूत रहा है। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को, चाहे वह किसी भी वेशभूषा या धर्म का हो, देश के सबसे बड़े पद पर बैठने का हक़ है। उनके लिए 'हिजाब पहनने वाली पीएम' महज़ एक महिला नहीं, बल्कि समावेशी भारत (Inclusive India) की एक पहचान है।

जनता क्या सोच रही है?
सोशल मीडिया पर इस बयान के बाद चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। कुछ लोग इमरान मसूद के 'प्रैक्टिकल' अप्रोच की तारीफ कर रहे हैं कि कम से कम किसी ने तो आईना दिखाया। वहीं ओवैसी के समर्थक इसे भविष्य की उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं।