अब आधार कार्ड के लिए शहर के चक्कर काटना बंद, यूपी के 1000 गांवों में खुलने जा रहे हैं आधार सेवा केंद्र

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News India Live, Digital Desk : अगर आप उत्तर प्रदेश के किसी गांव में रहते हैं, तो आपने एक परेशानी का सामना ज़रूर किया होगा आधार कार्ड में नाम बदलवाना हो या मोबाइल नंबर अपडेट करना हो, हमें पूरा दिन खराब करके शहर जाना पड़ता था। लेकिन अब 2026 की शुरुआत उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी 'डिजिटल विलेज स्कीम' (Digital Village Scheme) के तहत एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों में सीधे 'आधार सेवा केंद्र' खोलने जा रही है। इसका मतलब है कि अब आपको एक छोटी सी अपडेट के लिए शहर जाने, किराया खर्च करने और लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या है यह पूरी योजना?

दरअसल, यह कदम 'डिजिटल इंडिया' अभियान को असल मायनों में धरातल पर उतारने के लिए उठाया गया है। शुरुआत में राज्य की 1000 पंचायतों को चुना गया है, जहाँ ग्राम सचिवालय या जन सुविधा केंद्रों के जरिए ये सेवाएं दी जाएंगी। इसे सरकार की 'डिजिटल गांव योजना' का हिस्सा माना जा रहा है।

ग्रामीणों को क्या फायदे होंगे?

अक्सर बुजुर्गों या मजदूरों को आधार सेंटर तक जाने में पूरा दिन लग जाता था और उनकी दिहाड़ी का नुकसान होता था। अब गांव में ही सेंटर होने से:

  • वक्त और पैसे की बचत: न बस का किराया देना होगा और न ही शहर की भीड़-भाड़ में फंसना होगा।
  • फर्जीवाड़े से छुटकारा: गांव के लोग अक्सर शहर में दलालों के चंगुल में फंस जाते थे, अब सरकारी सेंटर पर सीधे काम होगा।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ: राशन कार्ड, किसान सम्मान निधि या पेंशन के लिए आधार अपडेट होना बहुत जरूरी होता है। गांव में सुविधा मिलने से ये काम फटाफट हो सकेंगे।

कैसे काम करेंगे ये केंद्र?

इन केंद्रों पर वे सभी सुविधाएं मिलेंगी जो शहर के बड़े आधार सेंटर्स पर होती हैं। चाहे आपको नया आधार बनवाना हो, बायोमेट्रिक अपडेट करना हो या फोटो बदलवानी हो, सब कुछ आपकी पंचायत में ही हो जाएगा। यहाँ ट्रेंड कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे ताकि सर्वर या तकनीकी समस्या की वजह से लोगों को परेशान न होना पड़े।

आगे का रास्ता

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह तो बस शुरुआत है। 1000 ग्राम पंचायतों के बाद सरकार का लक्ष्य इसे और बढ़ाने का है ताकि भविष्य में यूपी का हर गांव पूरी तरह 'डिजिटल' बन सके। अगर आपका गांव इस पहली लिस्ट में है, तो यकीन मानिए आपके लिए जिंदगी थोड़ी और आसान होने वाली है।

सच कहें तो, जब तक गांव का आम आदमी डिजिटल सुविधाओं से सीधे नहीं जुड़ेगा, तब तक तरक्की अधूरी है। यूपी सरकार का यह कदम उस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

उम्मीद है कि जल्द ही हमारे प्रदेश के बाकी गांव भी इस लिस्ट में शामिल होंगे। आपके गांव के हालात कैसे हैं? क्या वहां इंटरनेट और डिजिटल सेवाएं सही से पहुँच रही हैं? हमें कमेंट में ज़रूर बताएं।