कानपुर में दृश्यम जैसी वारदात, 7 बच्चों की माँ और वो सनकी आशिक, गड्ढे में दफन कर दी पूरी कहानी
News India Live, Digital Desk : अक्सर हम टीवी या फ़िल्मों में देखते हैं कि कोई अपराधी कैसे बहुत चतुराई से अपना जुर्म छिपाता है। हमने 'दृश्यम' जैसी फिल्में देखकर सोचा था कि हकीकत में ऐसा करना मुश्किल है, लेकिन कानपुर की एक घटना ने साबित कर दिया कि सच्चाई कभी-कभी कल्पना से भी ज्यादा डरावनी और कड़वी होती है।
कानपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर किसी भी आम इंसान का रिश्तों पर से भरोसा उठ जाए। यहाँ एक ऐसी महिला की हत्या कर दी गई, जो 7 मासूम बच्चों की माँ थी। और उससे भी ज़्यादा दुःख की बात यह है कि इसका आरोप उसी शख्स पर लगा है जिसके साथ उसके करीबी रिश्ते थे।
साज़िश और फ़िल्मी अंदाज़ (The Shocking Murder Mystery)
इस घटना ने पूरे कानपुर को सुन्न कर दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने महिला की हत्या करने के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए ठीक वैसे ही तरीके अपनाए जैसे हम किसी थ्रिलर फिल्म में देखते हैं। साज़िश के तहत आरोपी ने घर के पास ही एक गहरा गड्ढा खोदा और मृतका के शव को उसमें दफन कर दिया, ताकि किसी को कानो-कान भनक न लगे।
काफी दिनों तक यह राज गहरा बना रहा। परिवार के लोग और बच्चे माँ का इंतज़ार करते रहे, उन्हें लगा कि शायद वो कहीं चली गई है। लेकिन जब मामला पुलिस तक पहुँचा और सख्ती से जाँच शुरू हुई, तो जो सच सामने आया उसने सबको रूह कँपा कर रख दिया।
सात मासूमों के सिर से उठा साया
इस पूरी खौफनाक वारदात में जो सबसे ज्यादा तकलीफ देने वाली बात है, वो है उन 7 मासूम बच्चों का चेहरा। छोटे-छोटे बच्चों को क्या पता था कि जिस 'चाचा' या पड़ोसी पर वे भरोसा करते थे, उसी ने उनकी माँ की दुनिया खत्म कर दी है। माँ की कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता, और इस हत्या ने उन बच्चों को समाज की क्रूरता के बीच अकेला छोड़ दिया है।
पुलिस की चौकसी और गिरफ्तारी
कानपुर पुलिस के लिए यह केस सुलझाना एक बड़ी चुनौती थी। बिना शव मिले या बिना किसी ठोस सबूत के किसी पर आरोप लगाना मुश्किल था। लेकिन जब संदिग्ध के बयानों में फर्क आने लगा, तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया। आख़िरकार निशानदेही पर जब उस जगह को खोदा गया, जहाँ महिला को दफनाया गया था, तब जाकर पुलिस को सबूत मिले।
क्या सबक देती है ये घटना?
यह मामला सिर्फ एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि एक चेतावनी भी है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आजकल आपसी रिश्तों में सहनशीलता और संवेदनशीलता खत्म होती जा रही है। एक पल का गुस्सा या किसी गलत रिश्ते को छिपाने का डर, इंसान को जानवर बना देता है।
कानपुर की गलियों में आज सन्नाटा है, लेकिन हर किसी के मन में उन 7 बच्चों के लिए हमदर्दी है। हम यही दुआ कर सकते हैं कि गुनहगार को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन जाए, ताकि फिर किसी और घर की 'ममता' इस तरह ज़मीन के नीचे दफ़न न हो सके।