आपकी रसोई में छिपा है सेहत का खज़ाना, बस इन पुरानी आदतों को अपना लें

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Grandma's health tips : आज हमारी जिंदगी बहुत तेज हो गई है. सिर में दर्द हुआ तो गोली खा ली, नींद नहीं आई तो दवा ले ली. हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए हम तुरंत डॉक्टरों और दवाइयों पर निर्भर हो जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे दादा-दादी और नाना-नानी के समय में लोग बिना इतनी दवाइयों के भी हमसे कहीं ज़्यादा सेहतमंद और लंबा जीवन कैसे जी लेते थे?

उनका राज़ किसी महंगी डाइट या जिम में नहीं, बल्कि हमारी रसोई और रोज़ की छोटी-छोटी आदतों में छिपा था. चलिए, आज उन कुछ पुरानी और भूली-बिसरी बातों को याद करते हैं, जिन्हें अपनाकर हम भी एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.

1. दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से

हमारे बुज़ुर्ग हमेशा सुबह उठते ही सबसे पहले गुनगुना पानी पीने की सलाह देते थे. यह कोई सुनी-सुनाई बात नहीं है. सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से शरीर के अंदर जमा गंदगी बाहर निकल जाती है, पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया दुरुस्त होती है. यह आदत आपको दिनभर तरोताज़ा महसूस कराती है.

2. रसोई के मसाले, आपकी पहली फार्मेसी

आज हम जिन्हें सिर्फ स्वाद के लिए इस्तेमाल करते हैं, वे मसाले पहले दवा का काम करते थे.

  • हल्दी: चोट लगने पर या सर्दी-खांसी में हल्दी वाला दूध पीना आज भी सबसे कारगर इलाज माना जाता है. इसमें बीमारियों से लड़ने की ताकत होती है.
  • अजवाइन: पेट में हल्का दर्द या गैस होने पर गर्म पानी के साथ थोड़ी सी अजवाइन लेना आज भी पेट को तुरंत आराम देता है.
  • अदरक और लौंग: ये सर्दी और गले की खराश के लिए किसी भी सिरप से बेहतर काम करते हैं.

3. देसी घी, दोस्त है दुश्मन नहीं

आजकल के दौर में घी को मोटापे का दुश्मन मान लिया गया है. लेकिन हमारे बुज़ुर्ग रोटी पर घी लगाकर खाते थे और हमेशा ताकतवर रहते थे. असली देसी घी (गाय का) शरीर को कमज़ोर नहीं, बल्कि ताकत देता है. यह जोड़ों को चिकनाई देता है, त्वचा में चमक लाता है और दिमाग के लिए भी अच्छा होता है. बस मात्रा सही होनी चाहिए.

4. ज़मीन पर बैठकर भोजन करना

ज़मीन पर पालथी मारकर बैठकर खाना खाने की पुरानी आदत एक तरह का योगासन है. इस तरह बैठने से हमारा पेट हल्का सा दबता है और पाचन के लिए ज़रूरी रस अच्छे से निकलते हैं, जिससे खाना आसानी से पचता है. यह हमें ज़रूरत से ज़्यादा खाने से भी रोकता है.

5. मौसम के फल और सब्ज़ियां ही खाएं

हमारे बुज़ुर्ग वही खाते थे जो मौसम में उगता था. सर्दियों में गाजर, मूली, पालक और गर्मियों में लौकी, तोरई, खीरा. मौसमी फल और सब्ज़ियां उस मौसम में हमारे शरीर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ही होती हैं. बिना मौसम की (कोल्ड स्टोरेज की) चीज़ें खाने से शरीर को फायदा कम और नुकसान ज़्यादा होता है.

6. रात का खाना जल्दी और हल्का

"रात को राजा की तरह नाश्ता करो और भिखारी की तरह रात का खाना" - यह कहावत बहुत पुरानी और सच्ची है. सूरज ढलने के आसपास या सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले हल्का भोजन कर लेने से उसे पचने के लिए पूरा समय मिलता है. इससे नींद अच्छी आती है और सुबह पेट भारी महसूस नहीं होता.

ये कोई मुश्किल नियम नहीं हैं, बल्कि जीवन जीने के बहुत ही सरल तरीके हैं. इन्हें अपनाकर हम न सिर्फ छोटी-मोटी बीमारियों से दूर रह सकते हैं, बल्कि एक लंबा और स्वस्थ जीवन भी जी सकते हैं.