होली के रंगों पर ग्रहण का साया? मार्च 2026 में दिखेगा ब्लड मून, जानिए आपकी खुशियों पर क्या होगा असर
News India Live, Digital Desk: हम अभी साल 2025 के आखिरी दिन (31 दिसंबर) में खड़े हैं और कल से एक नया साल शुरू हो रहा है। जब हम साल भर के त्योहारों की लिस्ट देखते हैं, तो मार्च में आने वाली होली का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन साल 2026 की होली वैसी नहीं होगी जैसा हम सोचते हैं। इस बार रंगों के त्योहार पर एक अद्भुत और थोड़ी डराने वाली खगोलीय घटना होने जा रही है वह है साल का पहला चंद्र ग्रहण।
हैरान करने वाली बात ये है कि यह कोई मामूली ग्रहण नहीं, बल्कि उस रात आसमान में 'ब्लड मून' (Blood Moon) दिखाई देगा, यानी चंद्रमा लाल रंग का नज़र आएगा।
तारीख और समय: कब लगेगा ग्रहण?
खगोलशास्त्रियों और ज्योतिषियों की मानें तो यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च, 2026 को लगने वाला है। इसी दिन देशभर में होली का त्योहार मनाया जा रहा होगा। चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होगा, जब लोग गुलाल और उमंग में डूबे होंगे।
क्या 'सूतक काल' बिगाड़ेगा त्योहार का रंग?
अक्सर लोग ग्रहण के नाम से इसलिए घबराते हैं क्योंकि सूतक काल लग जाता है। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हम 2026 की होली पर रंग नहीं खेल पाएंगे?
देखिये, ग्रहण की शास्त्रीय मान्यता तभी होती है जब वह हमारी आंखों के सामने दिखे। अगर यह ग्रहण भारत में दृश्य (Visible) हुआ, तो निश्चित ही सूतक काल के कड़े नियम लागू होंगे। इसका असर होलिका दहन की पूजा और उसके समय पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पंडित जी और ज्योतिषी नए मुहूर्तों पर विचार करेंगे ताकि लोग ग्रहण से पहले ही धार्मिक अनुष्ठान पूरे कर लें।
क्यों होगा 'ब्लड मून'?
जब पृथ्वी की पूरी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब उसे 'पूर्ण चंद्र ग्रहण' कहा जाता है। इस स्थिति में सूरज की रोशनी जब पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर चाँद पर पहुँचती है, तो वो हल्का लाल या तांबे जैसा दिखने लगता है। इसे ही 'ब्लड मून' कहा जाता है। होली की रात को लाल रंग का चाँद देखना अपने आप में एक अनोखा अहसास होगा।
क्या सावधानी रखनी होगी?
पुराने समय से माना जाता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, मॉडर्न साइंस इसे केवल एक परछाई का खेल मानता है, लेकिन आस्था का अपना महत्व है।
- होली के पकवानों में तुलसी के पत्ते पहले से डाल कर रख लें।
- ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और दान करने का महत्व बढ़ जाएगा।
2026 के इस संयोग का असर
ज्योतिषीय नजरिए से होली और ग्रहण का एक साथ होना कुछ राशियों के लिए भाग्यशाली तो कुछ के लिए चुनौतियों भरा हो सकता है। यह तनावपूर्ण या उथल-पुथल वाली स्थितियों का भी संकेत देता है। ऐसे में सलाह यही है कि त्योहार की उमंग तो कम न होने दें, लेकिन नियमों का सम्मान ज़रूर करें।