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March 26 2026 12:24 pm

मैहर शक्तिपीठ का रहस्य रात में आज भी मंदिर आते हैं आल्हा-ऊदल नवरात्रि में दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे कष्ट

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News India Live, Digital Desk : विंध्य पर्वत श्रेणी की त्रिकुट पहाड़ी पर स्थित माँ शारदा का यह मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ माता सती का 'हार' गिरा था, जिसके कारण इस जगह का नाम 'मैहर' (माई का हार) पड़ा। लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका वह रहस्य है, जिसका जवाब आज के आधुनिक विज्ञान के पास भी नहीं है।

आल्हा-ऊदल का अनसुलझा रहस्य

स्थानीय मान्यताओं और पुजारी के दावों के अनुसार, मैहर मंदिर के कपाट रात में बंद होने के बाद भी यहाँ कोई अदृश्य शक्ति पूजा करने आती है।

पहली पूजा का रहस्य: कहा जाता है कि बुंदेलखंड के महान योद्धा 'आल्हा' और 'ऊदल', जो माँ शारदा के परम भक्त थे, आज भी अदृश्य रूप में सबसे पहले माता की पूजा करते हैं।

ताजे फूल और जल: मंदिर के कपाट सुबह खुलने पर गर्भगृह में ताजे फूल चढ़े हुए और जल अर्पित मिलता है, जबकि रात में वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

अमरता का वरदान: लोक कथाओं के अनुसार, आल्हा ने अपनी भक्ति से माँ को प्रसन्न कर अमरता का वरदान प्राप्त किया था।

नवरात्रि में मैहर का महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में मैहर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है।

त्रिकुट पर्वत की चढ़ाई: भक्त 1063 सीढ़ियां चढ़कर माता के दर्शन करने पहुँचते हैं। अब यहाँ रोपवे (Ropeway) की सुविधा भी उपलब्ध है।

मनोकामना पूर्ति: माना जाता है कि जो भक्त नवरात्रि में यहाँ अखंड ज्योति जलाते हैं या माता के दर्शन करते हैं, उनकी हर कठिन बाधा दूर हो जाती है।

संगीत और साधना: मैहर को 'संगीत की नगरी' भी कहा जाता है। महान संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खां भी माँ शारदा के अनन्य भक्त थे।

शक्तिपीठ की पौराणिक कथा

जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के हिस्से किए थे। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ बने। मैहर में माता का स्वर्ण हार गिरने के कारण इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

दर्शन का समय और सावधानी

समय: मंदिर आमतौर पर सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।

सावधानी: रात के समय पहाड़ी पर रुकने की मनाही है। प्रशासनिक नियमों के अनुसार, आरती के बाद मंदिर परिसर खाली कर दिया जाता है।