Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में बुझ जाए 'अखंड ज्योति' तो अनिष्ट के डर से न हों परेशान! अपनाएं ये अचूक उपाय, माता रानी करेंगी हर भूल क्षमा
नई दिल्ली/लखनऊ। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की आराधना का विशेष महत्व है। इन दिनों भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए घरों में 'अखंड ज्योति' प्रज्वलित करते हैं। मान्यता है कि नौ दिनों तक बिना बुझे जलने वाला यह दीपक साक्षात देवी के वास और घर की खुशहाली का प्रतीक है। हालांकि, कई बार पूरी सावधानी बरतने के बाद भी हवा के झोंके या घी की कमी से अखंड ज्योति बुझ जाती है। ऐसे में भक्तों के मन में अनिष्ट की आशंका और डर बैठ जाता है। लेकिन क्या ज्योति का बुझना वाकई माता की नाराजगी का संकेत है? ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, घबराने के बजाय सही विधि अपनाना जरूरी है।
भक्ति में 'भाव' सर्वोपरि: क्यों न डरें?
शास्त्रों और 'मार्कण्डेय पुराण' में स्पष्ट कहा गया है कि ईश्वर की साधना में 'भाव' और 'श्रद्धा' कर्मकांड की बारीकियों से कहीं ऊपर हैं। अखंड ज्योति का बुझना एक तकनीकी चूक हो सकती है। यदि आपकी नीयत साफ है और भक्ति निस्वार्थ है, तो एक छोटी सी मानवीय भूल आपकी नौ दिनों की कठिन साधना को भंग नहीं करती। माता रानी ममतामयी हैं और वे भक्त के मन के विश्वास को देखती हैं, न कि केवल दीपक की लौ को।
ज्योति बुझ जाए, तो तुरंत करें ये 5 काम
यदि अनजाने में अखंड दीपक शांत हो जाए, तो विचलित होने के बजाय शांत मन से इन चरणों का पालन करें:
साक्षी दीपक जलाएं: सबसे पहले एक नया छोटा दीपक (जिसे साक्षी दीपक कहते हैं) जलाकर माता के सम्मुख रखें।
पात्र की सफाई: अखंड ज्योति के पात्र को सावधानी से साफ करें। जली हुई पुरानी बाती (गुल) को हटा दें।
नई बाती का प्रयोग: दीपक में नई लंबी बाती लगाएं और पर्याप्त घी या तेल भरें।
पुनः प्रज्वलन: उसी साक्षी दीपक की लौ से अखंड ज्योति को दोबारा जलाएं। सीधे माचिस का प्रयोग करने से बचें।
क्षमा याचना: माता रानी के सामने हाथ जोड़कर अपनी अनजानी भूल के लिए माफी मांगें और 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का यथाशक्ति जाप करें।
अपराध क्षमापन स्तोत्र: हर भूल की काट
'दुर्गा सप्तशती' के अंत में वर्णित 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' भक्तों के लिए कवच की तरह है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि मनुष्य मंत्र, क्रिया और भक्ति से हीन हो सकता है, लेकिन मां अपने बालक की हर त्रुटि को क्षमा कर देती हैं। यदि ज्योति बुझ जाए, तो इस स्तोत्र का पाठ करना मन को शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।
अखंड ज्योति के जरूरी नियम
स्थान: दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, नीचे अष्टदल कमल या चावल की ढेरी जरूर बनाएं।
दिशा: घी का दीपक देवी के दाहिनी ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखना शुभ होता है।
सुरक्षा: दीपक के चारों ओर कांच का कवर या ऊंचे बर्तन का घेरा रखें ताकि हवा से बचाव हो सके।