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April 20 2026 09:56 pm

BHU में जाति पूछकर ब्राह्मण छात्र को थप्पड़ मारने का आरोप, सपा छात्र सभा के इकाई अध्यक्ष हिमांशु यादव पर FIR

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News India Live, Digital Desk: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कैंपस में एक बार फिर जातिगत विवाद और मारपीट की घटना सामने आई है। विश्वविद्यालय की समाजवादी छात्र सभा (सपा की छात्र इकाई) के बीएचयू इकाई अध्यक्ष हिमांशु यादव पर एक ब्राह्मण छात्र के साथ मारपीट और जातिगत टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया है कि हिमांशु ने पहले उससे उसकी जाति पूछी और 'ब्राह्मण' बताने पर उसे सरेआम थप्पड़ जड़ दिया।

क्या है पूरा मामला? (FIR के अनुसार)

लका पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के मुताबिक, घटना बुधवार, 1 अप्रैल 2026 की शाम की है।

पीड़ित का दावा: पीड़ित छात्र, जो बीएचयू का ही छात्र है, कैंपस के एक हॉस्टल के पास से गुजर रहा था। तभी हिमांशु यादव और उनके कुछ समर्थकों ने उसे रोका।

जातिगत सवाल: पीड़ित का आरोप है कि हिमांशु ने उससे नाम और जाति पूछी। जैसे ही छात्र ने खुद को ब्राह्मण बताया, हिमांशु ने कथित तौर पर अपशब्द कहे और उसे थप्पड़ मार दिया।

धमकी: छात्र ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि उसे दोबारा दिखने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

कैंपस में बढ़ा सियासी तनाव

इस घटना के बाद बीएचयू कैंपस में छात्रों के बीच भारी आक्रोश है।

छात्र संगठनों का विरोध: एबीवीपी (ABVP) और अन्य छात्र संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए हिमांशु यादव की तत्काल गिरफ्तारी और विश्वविद्यालय से निष्कासन की मांग की है। छात्रों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की 'जातिवादी गुंडागर्दी' बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सपा छात्र सभा का पक्ष: वहीं, समाजवादी छात्र सभा के सूत्रों का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश है और आगामी छात्र राजनीति को प्रभावित करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि वहां केवल सामान्य बहस हुई थी, कोई मारपीट नहीं।

पुलिस की कार्रवाई: भेलूपुर (लंका) पुलिस ने आईपीसी (अब भारतीय न्याय संहिता) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है।

बीएचयू प्रशासन अलर्ट

घटना के बाद कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रॉक्टर ऑफिस ने भी मामले का संज्ञान लिया है। चीफ प्रॉक्टर ने कहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसा या जातिगत भेदभाव को जगह नहीं दी जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'जातिगत समीकरणों' को लेकर पहले से ही बहस छिड़ी हुई है। अब बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह के आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया है।