BREAKING:
April 05 2026 07:14 am

Anjani Putra Sena : कौन है अंजनी पुत्र सेना? बंगाल चुनाव 2026 के बीच शोभा यात्रा से कैसे बदलेगी सियासत की तस्वीर

Post

News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शंखनाद के बीच 'अंजनी पुत्र सेना' (Anjani Putra Sena) नाम का संगठन एक बार फिर सुर्खियों में है। राम नवमी के अवसर पर हावड़ा में निकाली जाने वाली इनकी 'शोभा यात्रा' ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां ममता बनर्जी सरकार कानून-व्यवस्था का हवाला देकर इन रैलियों पर सख्त है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे 'हिंदू अस्मिता' से जोड़कर चुनावी लाभ लेने की तैयारी में है। आइए जानते हैं कि यह संगठन क्या है और बंगाल के सत्ता समीकरण में इसकी क्या भूमिका है।

क्या है अंजनी पुत्र सेना? (What is Anjani Putra Sena)

अंजनी पुत्र सेना एक हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के हावड़ा और आसपास के इलाकों में सक्रिय है।

स्थापना और उद्देश्य: संगठन का दावा है कि वे पिछले 25 वर्षों से राम नवमी की शोभा यात्रा निकाल रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार, युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और मंदिरों का जीर्णोद्धार करना है।

विवादों से नाता: साल 2023 और 2024 में हावड़ा के शिवपुर इलाके में राम नवमी के दौरान हुई हिंसा के बाद यह संगठन चर्चा में आया था। राज्य सरकार ने इन पर भड़काऊ भाषण और हथियारों के प्रदर्शन का आरोप लगाया था, जिसकी जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है।

कोर्ट की सख्ती और 2026 की शोभा यात्रा

इस साल यानी 26 मार्च 2026 को राम नवमी के अवसर पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंजनी पुत्र सेना को शोभा यात्रा निकालने की अनुमति तो दी है, लेकिन बेहद कड़ी शर्तों के साथ:

सीमित संख्या: रैली में एक समय में 500 से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते।

हथियारों पर प्रतिबंध: किसी भी प्रकार के वास्तविक हथियार (तलवार, गदा) ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। केवल PVC (प्लास्टिक) से बनी प्रतीकात्मक गदा की अनुमति है।

समय की पाबंदी: पुलिस और VHP की रैलियों से टकराव टालने के लिए कोर्ट ने इन्हें सुबह 8:30 से दोपहर 1:00 बजे तक का समय दिया है।

पहचान पत्र: सुरक्षा के लिहाज से प्रतिभागियों के आधार और पैन कार्ड की कॉपियां पुलिस को सौंपना अनिवार्य किया गया है।

चुनाव 2026: कैसे होगा ध्रुवीकरण का खेल?

बंगाल चुनाव के ठीक पहले राम नवमी का पड़ना राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा हथियार बन गया है।

भाजपा की रणनीति: भाजपा इस मुद्दे को ममता सरकार की 'तुष्टिकरण की राजनीति' के खिलाफ ढाल बना रही है। पीएम मोदी और अमित शाह की रैलियां राम नवमी के तुरंत बाद तेज होने वाली हैं। पार्टी का मानना है कि शोभा यात्राओं पर पाबंदी या टकराव से हिंदू मतदाताओं का ध्रुवीकरण होगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।

TMC का रुख: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें त्योहार से दिक्कत नहीं है, लेकिन 'दंगा भड़काने' की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टीएमसी इन संगठनों को भाजपा का 'बी-टीम' बताकर बाहरी लोगों द्वारा अशांति फैलाने का आरोप लगा रही है।

हावड़ा: सत्ता का प्रवेश द्वार

हावड़ा और आसपास की सीटें बंगाल चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। अंजनी पुत्र सेना जैसे संगठनों का प्रभाव शहरी और अर्ध-शहरी मध्यम वर्गीय हिंदू आबादी पर तेजी से बढ़ा है। भाजपा इन शोभा यात्राओं के जरिए 'हिंदू एकता' का संदेश देकर टीएमसी के मजबूत ग्रामीण और अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है।