ईरान में मौत का तांडव और इंटरनेट का सन्नाटा, क्या दुनिया की चुप्पी तोड़ पाएंगे ये 45 बेगुनाह?

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News India Live, Digital Desk : ज़रा सोचिए, एक ऐसा देश जहाँ की आवाम अपनी बात कहने के लिए बाहर निकलती है, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय इंटरनेट की 'खिड़की' ही बंद कर देती है ताकि दुनिया को पता न चल सके कि अंदर क्या हो रहा है। ईरान में फिलहाल यही हो रहा है।

अब तक की बड़ी हकीकत
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में जारी प्रदर्शनों ने इतना उग्र रूप ले लिया है कि अब तक करीब 45 लोगों की मौत हो चुकी है। ये वो लोग थे जो बेहतर भविष्य, हक और सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। मरने वालों की ये संख्या महज एक आंकड़ा नहीं है, ये वो 45 परिवार हैं जिनके चिराग बुझ चुके हैं।

इंटरनेट पर क्यों लगा ताला?
ईरान सरकार का पुराना तरीका रहा है जब भी आंदोलन बेकाबू होता है, इंटरनेट ठप कर दिया जाता है। इसका मकसद साफ है: ताकि प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया तक ये खूनी मंजर न पहुंच पाए। लेकिन सड़कों से जो खबरें छन-छनकर आ रही हैं, वे दिल दहला देने वाली हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का 'एंग्री' मोड
अब इस आग में घी डालने का काम किया है पूर्व (और प्रभावी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया ने। ट्रंप का गुस्सा इस बात पर है कि ईरान की सरकार जिस बेरहमी से प्रदर्शनकारियों को दबा रही है, वो असहनीय है। ट्रंप ने हमेशा ईरान की सरकार पर 'कड़ा रुख' अपनाया है, और अब इन मौतों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से आक्रामक होने का मौका दे दिया है। उन्होंने साफ़ चेतावनी दी है कि निहत्थे लोगों पर गोली चलाना 'बहादुरी' नहीं बल्कि डर है।

आखिर ये लड़ाई कब तक?
ईरान की जनता अब सिर्फ पेट्रोल की बढ़ती कीमतों या किसी कानून के विरोध में नहीं खड़ी है, बल्कि यह गुस्सा सालों के घुटन और बंदिशों का नतीजा है। लोग आज़ादी चाहते हैं और सिस्टम इस आज़ादी को छीनना चाहता है। जब इंटरनेट बंद होता है, तो समझ लीजिए कि जुल्म की इंतिहा हो रही है।

दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन चिल्ला रहे हैं, ट्रंप कड़े शब्दों में चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन क्या इससे सड़कों पर बहता खून रुक पाएगा? ईरान इस वक्त जिस मोड़ पर खड़ा है, वहाँ से पीछे हटना किसी भी पक्ष के लिए मुश्किल लग रहा है।