राम मंदिर आंदोलन का वो शेर शांत हो गया रामविलास वेदांती नहीं रहे, कल सरयू में दी जाएगी जल समाधि
News India Live, Digital Desk : सोमवार का दिन (15 दिसंबर 2025) सनातन प्रेमियों के लिए एक भारी मनहूसियत लेकर आया। खबर आई कि डॉ. राम विलास वेदांती का निधन हो गया है। वो 75 साल के थे।
उनके निधन की खबर ने सबको चौंका दिया, क्योंकि वो मध्य प्रदेश के रीवा में अपनी रामकथा के लिए प्रवास पर थे। कहते हैं न कि एक साधु का जीवन धर्म प्रचार में ही बीतता है, उनके साथ भी बिलकुल ऐसा ही हुआ। रीवा में ही उनकी तबियत अचानक बिगड़ी और उन्हें हार्ट अटैक (Heart Attack) आया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
कैसे हुआ यह सब?
बताया जा रहा है कि वेदांती जी पिछले कुछ दिनों से रीवा में थे। वहां 10 दिसंबर से उनका कार्यक्रम चल रहा था। लेकिन अचानक उनकी तबियत बिगड़ने लगी। सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें रीवा के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें एयरलिफ्ट (Airlift) करके मेदांता, गुरुग्राम ले जाने की तैयारी भी हो रही थी। खराब मौसम और घने कोहरे के कारण एयर एम्बुलेंस वहां लैंड नहीं कर पाई, और इसी बीच उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
अब आगे क्या? (सरयू में होगी जल समाधि)
साधु-संतों की परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार होगा। खबर है कि उनके पार्थिव शरीर को मध्य प्रदेश से सड़क के रास्ते उनकी कर्मभूमि अयोध्या (Ayodhya) लाया जा रहा है।
अयोध्या, जहाँ उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी बिताई, वही सरयू मैया की गोद में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक, कल (मंगलवार) को अयोध्या में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें 'जल समाधि' (Jal Samadhi) दी जाएगी। यह क्षण यक़ीनन हर राम भक्त की आंखों में आंसू ला देने वाला होगा।
योगी आदित्यनाथ का भावुक संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वेदांती जी के निधन को एक "बड़ी निजी क्षति" बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राम विलास वेदांती जी का जाना सनातन धर्म और राम मंदिर आंदोलन के लिए एक ऐसी कमी है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
सच कहें तो, 90 के दशक में जब राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था, तो वेदांती जी की हुंकार लोगों में अलग ही ऊर्जा भर देती थी। वो उन चुनिंदा नेताओं में से थे जो अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते थे। बाबरी विध्वंस मामले में भी वो एक प्रमुख चेहरा थे और उन्होंने हमेशा कहा कि उन्हें अपने किये पर कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि यह राम काज था।
आज जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर खड़ा है, तो इसकी नींव के पत्थरों में कहीं न कहीं डॉ. वेदांती का संघर्ष भी समाया हुआ है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।