झारखंड के लिए सबसे बड़ी खबर, हजारों घरों में जलेंगे रोजगार के दीये, वेल्सपन ग्रुप का मेगा प्लान तैयार

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News India Live, Digital Desk : अक्सर जब हम झारखंड की बात करते हैं, तो हमारे मन में सिर्फ़ खान-खदान और कच्चे माल का ख्याल आता है। लेकिन अब राज्य इस छवि को तोड़कर 'इंडस्ट्रियल हब' बनने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। इस मिशन को नई रफ्तार मिली है दावोस (Davos) में, जहाँ वेल्सपन ग्रुप (Welspun Group) ने घोषणा की है कि वह झारखंड में करीब 300 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है।

वेल्सपन के निवेश का असल मतलब क्या है?
देखा जाए तो 300 करोड़ रुपये सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं है। यह भरोसा है राज्य की नई औद्योगिक नीतियों (New Industrial Policy) पर। वेल्सपन ग्रुप दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक है, और जब वे निवेश का फैसला करते हैं, तो वे देखते हैं कि वहां की व्यवस्था और कनेक्टिविटी कैसी है। उनके आने से झारखंड के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत मजबूती मिलेगी।

युवाओं को क्या मिलेगा?
सच कहें तो, आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत तब होती है जब उसके इलाके में नई फैक्ट्रियां लगती हैं। वेल्सपन के इस निवेश से झारखंड में सैकड़ों डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। जब कोई बड़ा प्लांट लगता है, तो उसके आसपास छोटे दुकानदार, ट्रांसपोर्टर और स्किल्ड-अनस्किल्ड लेबर, सबको काम मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे झारखंड के युवाओं को काम के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ेगा।

राज्य सरकार की मेहनत रंग लाई
दावोस के वैश्विक मंच पर राज्य का पक्ष जिस तरह से रखा गया, यह उसी का नतीजा है। निवेश का यह माहौल तब बनता है जब निवेशकों को सुरक्षा और सुविधाएं दी जाती हैं। इससे पहले भी कई कंपनियों ने राज्य में अपनी दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन वेल्सपन का 300 करोड़ का प्रोजेक्ट धरातल पर आने के बाद दूसरे निवेशकों के लिए भी रास्ते खुलेंगे।

कुल मिलाकर, झारखंड अब केवल 'कोयला' देने वाला प्रदेश नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यहाँ बनी चीज़ें पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट की जाएँगी। यह झारखंड के स्वाभिमान और आर्थिक आज़ादी की दिशा में एक बड़ा और साहसी कदम है।