सिर्फ कागजों पर कंपनी और जेब में 39 करोड़? धनबाद के इस जीएसटी कांड ने विभाग को भी चकरा दिया

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News India Live, Digital Desk : आजकल जहाँ एक आम आदमी पाई-पाई का हिसाब रखने में लगा है, वहीं धनबाद में एक शख्स ने करोड़ों का ऐसा 'हवाई महल' खड़ा कर दिया जिसका जमीन पर कोई वजूद ही नहीं था। सेंट्रल जीएसटी (CGST) की टीम ने एक ऐसी जालसाजी पकड़ी है जहाँ सिर्फ कागजों का इस्तेमाल करके सरकार की आंखों में धूल झोंकी जा रही थी।

214 करोड़ का 'भूतिया' व्यापार!
जीएसटी विभाग को जब शक हुआ, तो उन्होंने छानबीन शुरू की। उन्हें पता चला कि कुछ फर्में ऐसी हैं जो धड़ल्ले से एक-दूसरे को माल बेच रही हैं। लेकिन जब उन पतों पर जाकर देखा गया, तो वहां न कोई दफ्तर था और न कोई गोदाम। कागजों पर यह व्यापार 214 करोड़ रुपये का दिखाया गया था। ताज्जुब की बात ये है कि असल में एक किलो का भी लेनदेन नहीं हुआ, सिर्फ 'फेक इनवॉइस' (फर्जी बिल) काटे गए।

कैसे हुई 39 करोड़ की सेंधमारी?
अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ कागज पर व्यापार दिखाकर किसी को क्या फायदा? असली खेल तो 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) का है। इस फर्जी व्यापार के जरिए आरोपी ने करीब 39 करोड़ रुपये का जीएसटी क्लेम कर लिया या यूं कहें कि टैक्स की चोरी कर ली। जब अफसरों ने डेटा खंगाला, तो कड़ियां आपस में जुड़ती गईं और इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हो गया।

भोले-भाले लोगों का इस्तेमाल
इस ठगी का सबसे डरावना हिस्सा ये है कि इसके लिए उन लोगों के दस्तावेजों (आधार और पैन कार्ड) का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें इस खेल की खबर तक नहीं थी। गरीब मजदूरों या छोटे काम करने वालों के नाम पर फर्में बनाई गईं। इससे ये समझ आता है कि किसी अनजान को अपने कागज देना कितना खतरनाक हो सकता है।

अधिकारियों की मुस्तैदी
धनबाद जीएसटी विभाग की यह कार्रवाई उन जालसाजों के लिए कड़ी चेतावनी है जो सोचते हैं कि ऑनलाइन सिस्टम में वो बच निकलेंगे। डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए अब हर फर्जी लेनदेन पर विभाग की नजर है। फिलहाल मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है और कई सफेदपोशों के नाम भी इस लिस्ट में सामने आ सकते हैं।

इस खबर ने फिर से साबित कर दिया है कि अपराध का रास्ता कितना भी बड़ा क्यों न लगे, आखिर में कानून के हाथ वहां तक पहुँच ही जाते हैं। सुरक्षित रहें और अपने जरूरी दस्तावेज किसी अनजान को बिल्कुल न दें।