छत्तीसगढ़ की स्टील फैक्ट्री में मौत का तांडव ,ब्लास्ट के पीछे आख़िर किसकी लापरवाही?

Post

News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ में औद्योगिक हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला बालोदाबाजार-भाटापारा जिले का है, जहाँ एक स्टील फैक्ट्री के अंदर अचानक एक जबरदस्त ब्लास्ट (Dhamaka) हुआ। धमाका इतना तेज़ था कि इसकी गूँज काफी दूर तक सुनी गई और आसमान में धुएं का गुबार छा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उस वक्त ऐसा लगा जैसे कोई बहुत बड़ा बम फटा हो।

खौफनाक था वह मंजर
विस्फोट के तुरंत बाद फैक्ट्री के अंदर भगदड़ मच गई। आग की लपटों और मलबे के बीच मज़दूर अपनी जान बचाने के लिए यहाँ-वहाँ भागने लगे। मज़बूरी की बात ये है कि कई मज़दूर इस धमाके की चपेट में सीधे तौर पर आ गए। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में कई लोगों की मौके पर ही जान चली गई है, जबकि कइयों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घायलों का शरीर बुरी तरह झुलस गया है और उन्हें अस्पताल ले जाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
जैसे ही हादसे की खबर फैली, मज़दूरों के परिजन और स्थानीय लोग मौके पर जमा होने लगे। हर तरफ सिर्फ चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का पालन किया जा रहा था? अक्सर देखा जाता है कि मुनाफा कमाने के चक्कर में मज़दूरों की ज़िंदगी को जोखिम में डाल दिया जाता है। इस हादसे ने प्रशासन और फैक्ट्री मालिक, दोनों पर कई सवालिया निशान लगा दिए हैं।

रेस्क्यू और जांच की तैयारी
मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुँच चुकी है। मलबे को हटाया जा रहा है ताकि अगर कोई नीचे फँसा हो तो उसे बाहर निकाला जा सके। मुख्यमंत्री और अन्य आला अधिकारियों ने इस हादसे पर दुख जताया है और मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन क्या जांच से उन मज़दूरों की जान वापस आएगी जिनका पूरा घर इन्हीं चंद पैसों की कमाई पर टिका था?

फिलहाल इलाके में तनाव और गमगीन माहौल है। यह हादसा एक चेतावनी है कि अगर अब भी औद्योगिक इकाइयों की सघन जांच नहीं हुई, तो ऐसे कितने और 'डेथ ट्रैप' (मौत के जाल) हमारे बीच खड़े रहेंगे। उम्मीद है कि घायलों को समय पर इलाज मिले और दोषियों पर ऐसी कार्रवाई हो जो एक नजीर बने।