माघ माह की सबसे बड़ी एकादशी आ रही है, 7 फरवरी 2026 का पूरा शुभ-अशुभ नियम यहां देखें
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। हर महीने में दो एकादशियां आती हैं, और हर एकादशी का अपना अलग नाम और महत्व होता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को जया एकादशी (Jaya Ekadashi) के नाम से जाना जाता है।
जया एकादशी व्रत करने से न केवल पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी खुलता है। यह दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और कठोर उपवास के लिए समर्पित होता है।
जया एकादशी व्रत 2026 कब है?
| विवरण | तिथि | दिन |
| जया एकादशी तिथि | (मान लीजिए) 7 फरवरी 2026 | शनिवार |
| एकादशी तिथि का प्रारंभ | 6 फरवरी 2026, शाम 07 बजकर 53 मिनट पर | |
| एकादशी तिथि का समापन | 7 फरवरी 2026, शाम 06 बजकर 53 मिनट पर |
जया एकादशी का उपवास सूर्योदय से शुरू होकर अगले दिन (द्वादशी तिथि) को खोला जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
एकादशी पर कौन से 4 बड़े काम नहीं करने चाहिए?
अगर आप एकादशी का व्रत रख रहे हैं या सामान्य तौर पर इस पवित्र दिन को मानते हैं, तो कुछ कामों को बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत टूट जाता है और पाप लगता है:
- चावल और अन्न का सेवन: इस दिन किसी भी रूप में चावल खाना पूरी तरह से मना होता है।
- तुलसी के पत्ते तोड़ना: एकादशी के दिन गलती से भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, क्योंकि यह माता लक्ष्मी का स्वरूप हैं। पूजा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पत्तों को एक दिन पहले ही तोड़ लेना चाहिए।
- द्वेष और क्रोध: इस दिन किसी की बुराई करना, गुस्सा करना, झूठ बोलना या बुरे विचार मन में लाना पाप माना जाता है। मन को शांत रखकर केवल भगवान विष्णु के नाम का जाप करना चाहिए।
एकादशी का पारण कब और कैसे करें?
व्रत तभी पूरा माना जाता है जब इसका पारण (व्रत तोड़ना) सही समय और तरीके से किया जाए। जया एकादशी का पारण अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है।
- पारण विधि: पारण के समय सबसे पहले तुलसी युक्त जल या फलाहार से व्रत तोड़ें। इसके बाद ही सादा भोजन ग्रहण करें। पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना ज़रूरी होता है।