भीलवाड़ा की वो काली शाम, जब एक मां ने खुद ही उजाड़ दिया अपना हरा भरा संसार

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल आसपास के इलाके को, बल्कि पूरे देश को सन्न कर दिया है। एक घर जो बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता था, वहां अब सिर्फ़ सन्नाटा और पुलिस की चौकसी है। खबर है कि एक मां ने पहले अपने ही मासूम बच्चों को मौत के घाट उतारा और फिर खुद भी फांसी के फंदे से झूल गई।

यह कोई साधारण अपराध की खबर नहीं है, यह एक सामाजिक और मानसिक त्रासदी है जिसे सुनकर कलेजा मुंह को आता है।

अचानक मची चीख-पुकार
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सब कुछ सामान्य लग रहा था। पड़ोसियों को अंदाज़ा भी नहीं था कि बंद दरवाज़ों के पीछे मौत का ऐसा तांडव होने वाला है। जब काफी देर तक घर से कोई हलचल नहीं हुई और संदेह हुआ, तब इस भयानक सच का खुलासा हुआ। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर अनुभवी अफसरों की आंखें भी नम हो गईं।

आखिर ममता इतनी बेबस कैसे हुई?
सवाल उठना लाजिमी है कि एक मां जो अपने बच्चों की एक खरोंच पर तड़प उठती है, उसने खुद उनके प्राण कैसे ले लिए? क्या यह घरेलू कलह का मामला था, या वह महिला लंबे समय से किसी गहरे मानसिक तनाव (Depression) से जूझ रही थी? अक्सर हम अपने आसपास रहने वाले लोगों की खामोशी को पहचान नहीं पाते। छोटी-छोटी अनबन और अनकहे दर्द कब इतना विकराल रूप ले लेते हैं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

पुलिस की जांच और उलझी गुत्थी
भीलवाड़ा पुलिस इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। सुसाइड नोट, फोन रिकॉर्ड्स और आसपास के लोगों से पूछताछ जारी है ताकि इस भयानक कदम के पीछे की असली वजह का पता लगाया जा सके। फिलहाल, इस घर के मुखिया और अन्य परिजनों का बुरा हाल है, जिनकी दुनिया एक ही झटके में तबाह हो गई।

हमें क्या सोचना होगा?
ऐसी घटनाएं चेतावनी हैं कि समाज में बातचीत के रास्ते कम होते जा रहे हैं। अगर परिवार में किसी को अकेलापन या मानसिक परेशानी महसूस हो रही है, तो उसे समय पर पहचानना और सहारा देना बहुत ज़रूरी है। भीलवाड़ा की यह घटना सिर्फ़ एक परिवार का अंत नहीं है, बल्कि यह हार है उस इंसानियत की जो वक्त रहते दर्द नहीं समझ पाई।