तेमजेन इमाना अलॉन्ग का बड़ा बयान, पूर्वोत्तर के लोगों को लेकर होने वाले भेदभाव पर आखिर क्या कह गए बाबा?
News India Live, Digital Desk : सोशल मीडिया पर नागालैंड के उच्च शिक्षा और पर्यटन मंत्री तेमजेन इमाना अलॉन्ग काफी लोकप्रिय हैं। उनकी खासियत यह है कि वह बहुत ही गंभीर बात को भी बेहद सहज और मजाकिया ढंग से कहने की ताकत रखते हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने जो संदेश साझा किया है, उसमें चुटकुले कम और दर्द की एक टीस ज़्यादा है।
उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो पूर्वोत्तर के लोगों को उनकी बनावट के कारण 'चीनी' समझते हैं या उन पर 'मोमो' जैसे फब्तियां कसते हैं।
पहचान की यह जंग क्यों?
भारत जैसे विविधता भरे देश में हर राज्य की अपनी खूबसूरती और बनावट है। लेकिन तेमजेन ने एक पुरानी पीड़ा को आवाज़ देते हुए कहा कि "हम चीनी नहीं हैं और न ही हम मोमो हैं। हम उतने ही भारतीय हैं, जितना दिल्ली या मुंबई का कोई नागरिक।" यह अपील सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं का सच है जो दिल्ली, बैंगलोर या कोलकाता में पढ़ाई और नौकरी करने आते हैं, पर जिन्हें अक्सर विदेशी जैसा महसूस कराया जाता है।
राष्ट्रवाद और संस्कृति का मेल
तेमजेन इमाना अलॉन्ग ने बड़े ही गर्व के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों का जिक्र किया। उनका संदेश साफ़ था—भारत सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि उन करोड़ों लोगों का मेल है जिनके चेहरे भले ही एक जैसे न हों, लेकिन उनकी वफादारी सिर्फ भारत के लिए है। उन्होंने अक्सर यह दिखाया है कि पूर्वोत्तर के लोग किस तरह अपनी परंपराओं को बचाते हुए भारत माता की सेवा में जुटे हुए हैं।
सोशल मीडिया का रिएक्शन
जैसे ही यह वीडियो या अपील सामने आई, लोगों ने इसे जमकर साझा किया। कोई इसे "भारत की असली पहचान" कह रहा है तो कोई यह मान रहा है कि वाकई हमें अपनी सोच बदलने की ज़रूरत है। तेमजेन ने अपनी बातों से यह साफ़ कर दिया कि एकता का मतलब सब कुछ एक जैसा होना नहीं, बल्कि अलग-अलग होकर भी साथ खड़ा होना है।
बदलाव की ज़रूरत
अंत में बात सिर्फ तेमजेन इमाना अलॉन्ग के बयान की नहीं है। बात यह है कि एक भारतीय होने के नाते हम दूसरे को किस नजर से देखते हैं। पूर्वोत्तर के लोग हमारी सेना में लड़ रहे हैं, हमारे खिलाड़ियों के रूप में गोल्ड मेडल ला रहे हैं और हर क्षेत्र में नाम रौशन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना या उन्हें उनके खान-पान और रंग-रूप से चिढ़ाना बंद होना चाहिए।