टीम इंडिया की जीत और धर्म का चश्मा आखिर मुफ्ती नदवी के बयान पर क्यों भड़क गए राजीव शुक्ला?
News India Live, Digital Desk : जब भी देश की क्रिकेट टीम मैदान पर तिरंगा लहराती है, तो 140 करोड़ भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। जीत चाहे छोटी हो या बड़ी, वह पूरे देश की साझा खुशी होती है। लेकिन क्या हो जब इस गौरवशाली क्षण को भी विवादों के चश्मे से देखा जाए? हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने क्रिकेट प्रेमियों और देशवासियों को निराश कर दिया।
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने एक मौलवी, मुफ्ती शमहल नदवी के विवादित बयानों पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। मामला इतना बढ़ गया है कि राजीव शुक्ला ने अब सीधे कार्रवाई की मांग कर दी है।
आखिर गुस्सा किस बात का है?
दरअसल, मुफ्ती शमहल नदवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह भारतीय क्रिकेट टीम की जीत या खेल के किसी पहलू को लेकर ऐसी बातें करते नजर आए, जो राजीव शुक्ला के मुताबिक न केवल अनुचित थीं, बल्कि समाज में नफरत घोलने वाली थीं। राजीव शुक्ला का कहना है कि जब हमारी टीम खेलती है, तो मैदान पर 'सिर्फ खिलाड़ी' होते हैं, कोई धर्म या जाति नहीं। वहां रोहित, विराट और सिराज—सब एक ही रंग में रंगे होते हैं, और वह रंग है टीम इंडिया का नीला।
राजीव शुक्ला ने जोर देकर कहा कि टीम इंडिया के खिलाड़ियों के खिलाफ ऐसी अपमानजनक टिप्पणी करना या उनकी उपलब्धि को धर्म से जोड़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो अपनी विवादित बातों से देश का माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं।
खेल को खेल ही रहने दें
आजकल सोशल मीडिया के दौर में लोग सुर्खियां बटोरने के लिए अक्सर कुछ भी कह जाते हैं, लेकिन खेल जैसी जगह पर, जो देश को जोड़ने का काम करती है, वहां नफरत की जगह नहीं होनी चाहिए। राजीव शुक्ला का मानना है कि मुफ्ती जैसे प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उनकी बातों का समाज पर बुरा असर पड़ता है।
क्या है लोगों की राय?
बीजेपी और अन्य दलों के नेता भी अक्सर क्रिकेट को लेकर संवेदनशील रहे हैं, लेकिन इस बार राजीव शुक्ला (जो खुद कांग्रेस से हैं और क्रिकेट बोर्ड में भी अहम भूमिका निभाते हैं) का सामने आना यह बताता है कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र गौरव का बन गया है। आम फैंस भी यही कह रहे हैं कि क्रिकेट हमारा जुनून है, इसे अपनी नफरती राजनीति का मैदान न बनाएं।
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस तरह की बयानबाजियों पर लगाम लगेगी ताकि हम सब बिना किसी भेदभाव के सिर्फ अपने 'Men in Blue' की जीत का जश्न मना सकें।