विकास या विवाद? मणिपुर में नियमों को ताक पर रखकर बना दी गई सड़क, अब लग गई पूरी तरह पाबंदी
News India Live, Digital Desk : मणिपुर पिछले काफी समय से अपनी आंतरिक परिस्थितियों के कारण चर्चा में रहा है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है और काफी चौंकाने वाला भी। सोचिए, एक तरफ प्रशासन सुरक्षा और कानून व्यवस्था सुधारने में लगा है, और दूसरी तरफ एक पूरा का पूरा 'रिंग रोड' बिना किसी कानूनी परमिशन के ही तैयार कर दिया गया। इतना ही नहीं, इस सड़क का नाम भी ऐसे लोगों (उग्रवादियों) के नाम पर रख दिया गया, जो सुरक्षा एजेंसियों की नजर में विवादित रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद मणिपुर में बने एक अवैध रिंग रोड को लेकर है। जब मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास पहुँचा, तो जो तथ्य सामने आए उन्होंने सबको हैरान कर दिया। इस सड़क के निर्माण के लिए न तो पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) ली गई और न ही स्थानीय अथॉरिटी से कोई कागजी अनुमति मांगी गई। मानो किसी ने अपनी मर्जी से ही जंगल और जमीन पर बुलडोजर चला दिया हो।
उग्रवादियों के नाम पर सड़क, सवाल तो उठेंगे ही
किसी भी सार्वजनिक सड़क का नाम आमतौर पर महापुरुषों, शहीदों या प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नाम पर रखा जाता है। लेकिन इस रिंग रोड के साथ जो हुआ, वो राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशीलता के लिहाज से बहुत गंभीर है। इस सड़क का नामकरण कुछ ऐसे संगठनों और उग्रवादी नेताओं के नाम पर करने की कोशिश की गई, जिनका इतिहास हिंसा और अस्थिरता से जुड़ा रहा है। इसी बात ने आग में घी डालने का काम किया है।
NGT का सख्त एक्शन
जैसे ही यह मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुँचा, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अपनी नाराजगी जताने में बिल्कुल भी देरी नहीं की। कोर्ट ने साफ़ कहा कि प्रकृति के साथ इस तरह का खिलवाड़ और नियमों की इतनी बड़ी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। एनजीटी ने तुरंत इस सड़क के इस्तेमाल और किसी भी तरह के आगे के काम पर पूरी तरह से पाबंदी (Ban) लगा दी है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर असर
मणिपुर की वादियाँ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं। बिना किसी स्टडी और मंजूरी के पहाड़ों को काटकर सड़क बनाना न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि यह भविष्य में भूस्खलन (Landslides) जैसी आपदाओं को भी न्यौता देता है। इस पर उग्रवाद से जुड़ा यह विवाद मामले को और अधिक उलझा देता है।
सीधा सवाल यही है कि क्या कोई भी इतना शक्तिशाली हो सकता है कि बिना सरकार और कानून की नजर में आए इतना बड़ा निर्माण कार्य करवा दे? एनजीटी के इस फैसले ने फिलहाल तो इस विवादित 'नाम' और 'काम' दोनों पर ब्रेक लगा दिया है।