Bulldozer Action in Rajasthan : पक्षियों का बसेरा छीना तो अब सरकार देगी सबक ,चंदलाई झील पर जिन्होंने बनाए मकान और दीवारें

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान की खूबसूरत 'चंदलाई झील' के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा था। इस झील को लोग अक्सर इसके शांत माहौल और विदेशी पक्षियों के दीदार के लिए पसंद करते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में यहाँ का नज़ारा बदलने लगा। लालच और प्रशासन की ढिलाई के चलते झील की सीमा में लोगों ने अपने फॉर्महाउस, दीवारें और कच्ची-पक्की दुकानें तान दीं।

लेकिन अब उन कब्ज़े करने वालों की नींद उड़ने वाली है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साफ़ कर दिया है कि पर्यावरण के साथ यह खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

NGT की सख्त फटकार और बुलडोजर की तैयारी
हालिया सुनवाई में एनजीटी ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल का कहना है कि झील का इकोसिस्टम बर्बाद हो रहा है और अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह झील सिर्फ कागज़ों में रह जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि झील की ज़मीन और कैचमेंट एरिया में जितने भी अवैध निर्माण हुए हैं, उन्हें बिना किसी देरी के 'बुलडोजर' से ढहा दिया जाए।

आखिर चंदलाई क्यों है इतनी खास?
जयपुर से करीब 30-35 किलोमीटर दूर यह झील न सिर्फ जल संरक्षण के लिए अहम है, बल्कि यह यूरोप और साइबेरिया से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों का मुख्य केंद्र है। अगर यहाँ अवैध निर्माण होता है और शोर बढ़ता है, तो ये पक्षी रास्ता बदल लेंगे और हमारी आने वाली पीढ़ी सिर्फ किताबों में ही इनकी खूबसूरती को देख पाएगी।

अवैध कब्जेदार अब मुश्किल में!
सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमों ने उन लोगों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है जिन्होंने नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर झील के करीब अपनी ज़मीनें हथिया ली हैं। इस बार बहाने काम नहीं आएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रसूखदार लोग झील किनारे अपनी बाउंड्री बढ़ाते हैं, तो पानी के रास्ते रुक जाते हैं और इसका खामियाजा पूरे इलाके को भुगतना पड़ता है।

हमारा भी है फ़र्ज़!
सिर्फ कानून या एनजीटी ही सबकुछ नहीं कर सकता। अगर हम और आप इन ऐतिहासिक झीलों को कचरे और कब्ज़ों से नहीं बचाएंगे, तो जल संकट और भीषण होता जाएगा। एनजीटी का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो सोचते हैं कि पैसे के दम पर सरकारी और प्राकृतिक ज़मीन को अपना बनाया जा सकता है।

जल्द ही चंदलाई की सड़कों पर भारी फोर्स और बुलडोजर की आवाज गूँजने वाली है। देखते हैं, क्या अब प्रशासन वाकई अपनी मुस्तैदी दिखाता है या फिर फाइलें दोबारा दब जाती हैं।

आपकी राय? क्या झील और पर्यावरण को बचाने के लिए ये बुलडोजर कार्रवाई ज़रूरी है? क्या सरकार को कब्ज़े करने वालों पर भारी जुर्माना भी लगाना चाहिए? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं!