अजमेर में चुने हुए पार्षद को ही बना दिया बाहरी, फॉर्म 7 के गलत इस्तेमाल ने बढ़ाई टेंशन
News India Live, Digital Desk : आजकल की राजनीति में क्या-क्या नहीं होता, लेकिन राजस्थान के अजमेर से एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। ज़रा सोचिए, आप एक पार्षद (Councillor) हैं, अपने इलाके के प्रतिनिधि हैं, लेकिन जब आप वोटर लिस्ट चेक करते हैं तो पता चलता है कि आपका ही नाम वहां से गायब है। जी हाँ, अजमेर के एक वार्ड पार्षद के साथ यही हुआ है और अब इस मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आख़िर कैसे हुआ ये 'खेला'?
पूरी कहानी 'फॉर्म-7' के इर्द-गिर्द घूमती है। चुनाव आयोग के नियम के अनुसार, फॉर्म-7 का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटाना हो या तो उसकी मृत्यु हो गई हो या फिर वह शहर छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो गया हो। लेकिन इस मामले में किसी 'शातिर दिमाग' ने पार्षद के नाम से ही फर्जी फॉर्म भर दिया और यह दिखा दिया कि वे अब उस क्षेत्र के निवासी नहीं रहे।
हैरानी की बात तो ये है...
मजेदार और थोड़ी डराने वाली बात ये है कि जिस विभाग (BLO और अन्य चुनावी अमले) की जिम्मेदारी है कि वे घर-घर जाकर इस बात की पुष्टि करें, उन्होंने बिना किसी गहरी पड़ताल के ही पार्षद का नाम लिस्ट से डिलीट कर दिया। सवाल ये है कि अगर किसी चुने हुए प्रतिनिधि के दस्तावेजों की ऐसी अनदेखी हो सकती है, तो एक आम नागरिक की लिस्ट में कितनी गलतियां हो सकती हैं?
क्या ये कोई साज़िश है?
इस घटना के बाद शहर के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये महज़ एक प्रशासनिक गलती है या फिर किसी ने जानबूझकर उन्हें चुनावी दौड़ से बाहर करने के लिए ऐसा किया है? पार्षद साहब ने अब इसकी शिकायत बड़े अफसरों से की है और जांच की मांग उठाई है।
हम और आप क्या कर सकते हैं?
अजमेर के इस वाकये ने हमें एक बड़ी सीख दी है। चाहे चुनाव कल हों या अगले साल, हमें अपनी और अपने परिवार की वोटिंग डिटेल्स को समय-समय पर ऑनलाइन या फिजिकल तरीके से चेक करते रहना चाहिए। ऐसा न हो कि मतदान के दिन आप पोलिंग बूथ पहुँचें और आपको पता चले कि आपका तो नाम ही नहीं है।
फिलहाल, अजमेर प्रशासन इस मामले को दबाने और सुधारने में जुटा है, लेकिन ये 'वोटर लिस्ट स्कैम' जैसा किस्सा एक चेतावनी की तरह सामने आया है। देखते हैं कि अब दोषियों पर क्या गाज गिरती है