आंध्र प्रदेश में धधक उठी टाटा-एर्नाकुलम एक्सप्रेस की बोगियां, पढ़िए उस वक्त वहां क्या हुआ?
News India Live, Digital Desk : रेल का सफर अक्सर यादों और सुकून भरा होता है, लेकिन सोचिए जब चलती ट्रेन में अचानक आग की लपटें दिखाई देने लगें, तो यात्रियों पर क्या गुजरती होगी। कुछ ऐसा ही डरावना मंजर आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में देखने को मिला, जब टाटा-एर्नाकुलम एक्सप्रेस (Tatanagar-Ernakulam Express) की बोगियों में अचानक आग भड़क उठी।
अचानक फैला धुआं और मच गई चीख-पुकार
घटना उस वक्त हुई जब ट्रेन अपनी सामान्य रफ्तार से दौड़ रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो अचानक ट्रेन के डिब्बों से धुआं निकलने लगा। जैसे ही यात्रियों ने देखा कि बोगियों के नीचे से आग की लपटें निकल रही हैं, पूरी ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। रात या सफर की थकान में डूबे यात्री हड़बड़ा कर इधर-उधर भागने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है।
सांसें हलक में अटक गईं, पर खुशकिस्मती साथ थी
यह आग ट्रेन के दो कोचों में लगी थी। राहत की बात यह रही कि जैसे ही धुआं दिखा, समय रहते अलर्ट जारी हो गया। यात्रियों ने चेन खींचकर या अधिकारियों को सूचना देकर ट्रेन को रुकवाया। जैसे ही ट्रेन रुकी, लोग अपने सामान की परवाह किए बिना अपनी जान बचाने के लिए पटरियों की ओर कूद पड़े। भगवान का शुक्र रहा कि इस हादसे में अभी तक किसी की जान जाने या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं आई है, लेकिन लोगों के मन में डर ऐसा बैठ गया कि उन्हें दोबारा ट्रेन में चढ़ने में भी वक्त लगा।
रेलवे का एक्शन और आगे का काम
जैसे ही सूचना मिली, रेलवे का अमला और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुँच गईं। आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू हुईं और प्रभावित कोचों को अलग करने का काम भी तुरंत किया गया ताकि आग बाकी ट्रेन में न फैल सके। हालांकि, इस घटना की वजह से उस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही पर भी थोड़ा असर पड़ा।
अभी भी बना है एक बड़ा सवाल
अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि आग आखिर लगी कैसे। क्या यह शॉर्ट सर्किट था या फिर कुछ और? रेलवे की टीम ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। अक्सर इस तरह की घटनाओं के पीछे तकनीकी खामियां होती हैं, लेकिन यह हादसा एक बार फिर ट्रेन यात्रा के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़ा करता है।
साफ है कि एक बड़ी लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी, लेकिन सतर्कता की वजह से सैकड़ों जिंदगियां बच गईं। अब बस उम्मीद यही है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।