लंदन से हुई तारिक़ रहमान की घर वापसीबांग्लादेश के चुनावों पर क्या होगा इसका असर?

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News India Live, Digital Desk : पूरे 17 साल बाद बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में एक ऐसा नाम फिर से गूंज रहा है, जिसकी वापसी से वहां की सियासत में हलचल तेज हो गई है. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक़ रहमान की. पिछले 17 सालों से वे लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे थे, लेकिन अब उन्होंने स्वदेश वापसी कर ली है. उनकी वापसी से राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है और आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति एक नया मोड़ ले सकती है.

तारिक़ रहमान, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे हैं और बीएनपी में उनकी तूती बोलती है. हालांकि, उनका राजनीतिक करियर हमेशा विवादों से घिरा रहा है. उन पर भ्रष्टाचार, हत्या के प्रयास (जिसमें मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना पर 2004 में हुए ग्रेनेड हमले की साजिश का आरोप भी शामिल है) और आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे कई गंभीर आरोप लगे हैं. इन आरोपों के चलते उन्हें अदालतों द्वारा विभिन्न मामलों में सजा भी सुनाई गई है. इन सबके बावजूद, वो पार्टी के भीतर एक मज़बूत नेता माने जाते हैं और उनका समर्थकों के बीच अच्छा खासा प्रभाव है.

अब उनकी घर वापसी ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश में आम चुनाव नजदीक हैं. इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी वापसी का देश की चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा.
पिछले कुछ सालों से आवामी लीग की शेख हसीना सरकार लगातार सत्ता में है. विपक्ष हमेशा आरोप लगाता रहा है कि आवामी लीग लोकतंत्र को कमज़ोर कर रही है और विरोधी आवाज़ों को दबा रही है. ऐसे में तारिक़ रहमान का वापस आना बीएनपी के लिए एक नई जान फूंक सकता है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारिक़ रहमान अपनी पार्टी, बीएनपी को दोबारा मजबूत करने की पूरी कोशिश करेंगे. उनके नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा दे सकती है. हालांकि, उनका अतीत उनके रास्ते में एक बड़ी चुनौती भी पेश करेगा. उन पर लगे भ्रष्टाचार और हिंसा के आरोप मतदाताओं के मन में सवाल खड़ा कर सकते हैं.

एक तरफ, उनकी वापसी से आवामी लीग के लिए चुनावी राह थोड़ी कठिन हो सकती है. वहीं, दूसरी ओर, यह आवामी लीग को अपने समर्थकों को एकजुट करने का एक और बहाना भी दे सकती है, यह कहकर कि देश को ऐसे विवादित नेताओं से बचाना है. कुल मिलाकर, तारिक़ रहमान की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में बांग्लादेश की सियासत में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.