Sweet Potato : कहीं आप भी तो नहीं खा रहे 'रंगीन' शकरकंद? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान
News India Live, Digital Desk : सर्दियों के मौसम में शकरकंद (Sweet Potato) खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली चमकदार और लाल दिखने वाली शकरकंद आपके स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुँचा सकती है? शकरकंद विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का खजाना है, लेकिन मिलावटखोरों ने अब इसे भी नहीं बख्शा है। चमकदार लाल रंग की शकरकंद देखकर हम उसे अक्सर 'क्वालिटी' समझकर खरीद लेते हैं, जबकि कई बार यह महज सिंथेटिक कलर का कमाल होता है। अगर आप अपने परिवार की सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं, तो खरीदने से पहले ये 4 टेस्ट जरूर करें:
1. पानी का आसान टेस्ट (The Water Test)
यह सबसे सरल तरीका है। एक बड़े कटोरे में पानी लें और उसमें शकरकंद को 5-10 मिनट के लिए भिगो दें।
नकली पहचान: अगर पानी का रंग गुलाबी या लाल होने लगे, तो समझ जाएं कि उस पर बाहरी रंग का इस्तेमाल किया गया है।
असली पहचान: असली शकरकंद का रंग पानी में नहीं छूटता।
2. रुई (Cotton Ball) का जादू
बाजार में शकरकंद खरीदते समय आप यह टेस्ट कर सकते हैं। एक साफ रुई का फाहा (Cotton Ball) लें और उसे थोड़े से पानी या वेजिटेबल ऑयल में डुबोएं।
जांच: इसे शकरकंद की ऊपरी सतह पर रगड़ें। अगर रुई पर लाल या गुलाबी रंग के निशान आ जाते हैं, तो वह शकरकंद मिलावटी है।
3. रगड़कर देखें (The Scrub Test)
शकरकंद को अपनी उंगलियों या किसी खुरदरी सतह से हल्के से रगड़ें।
सावधानी: अगर रगड़ने पर रंग आपकी उंगलियों पर चिपक जाता है या शकरकंद के नीचे से हल्का पीला या सफेद रंग दिखाई देने लगता है, तो उस पर रंग की परत चढ़ाई गई है। असली शकरकंद की त्वचा रगड़ने पर अपना प्राकृतिक रंग नहीं छोड़ती।
4. उबालने के बाद का बदलाव (Boiling Method)
जब आप शकरकंद उबालते हैं, तब भी उसकी शुद्धता का पता चल सकता है।
नकली: उबालते समय अगर पानी गहरा लाल या मटमैला गुलाबी हो जाए और शकरकंद का रंग बिल्कुल फीका पड़ जाए, तो वह केमिकल युक्त हो सकता है।
असली: असली शकरकंद उबालने पर भी अपना प्राकृतिक रंग बरकरार रखती है और पानी में कोई गहरा रंग नहीं छोड़ती।
नकली रंग 'Rhodamine-B' से सावधान!
अक्सर शकरकंद पर रोडामाइन-बी (Rhodamine-B) नामक डाई का इस्तेमाल किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इस केमिकल का सेवन पेट की बीमारियों, लिवर को नुकसान और यहाँ तक कि कैंसर का कारण भी बन सकता है।