अखिलेश के PDA पर भड़के स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- कभी D का मतलब दलित तो कभी डिंपल होता है
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सबसे बड़े सियासी हथियार 'PDA' पर उनके ही पूर्व साथी स्वामी प्रसाद मौर्य ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौर्य ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव का PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) गठबंधन एक "छलावा" है, जिसका इस्तेमाल केवल सत्ता हासिल करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि सपा में 'D' शब्द का अर्थ सुविधानुसार बदल दिया जाता है।
'D' का मतलब दलित नहीं, डिंपल है: मौर्य का विवादित बयान
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर परिवारवाद और अवसरवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि जब चुनाव में वोट चाहिए होते हैं, तो 'D' का अर्थ दलित बताया जाता है। लेकिन जब सत्ता या पदों के बंटवारे की बात आती है, तो 'D' का अर्थ सिमटकर केवल डिंपल यादव या परिवार के सदस्यों तक रह जाता है।
धोखे का आरोप: मौर्य ने कहा कि दलितों को इस गठबंधन में केवल वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है, उन्हें वास्तविक नेतृत्व या हिस्सेदारी नहीं दी जा रही है।
PDA एक छलावा: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि PDA पिछड़ों और दलितों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
PDA के आंतरिक विरोधाभास: क्यों उठा यह विवाद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य का यह हमला सपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश है।
टिकट वितरण पर नाराजगी: मौर्य का मानना है कि राज्यसभा और अन्य महत्वपूर्ण चुनावों में सपा ने दलितों और अति-पिछड़ों की अनदेखी कर अपने करीबियों को तरजीह दी।
विचारधारा की लड़ाई: मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की सपा अब लोहिया के सिद्धांतों से भटक गई है और केवल सॉफ्ट हिंदुत्व और परिवारवाद की राह पर चल रही है।
अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला क्या है?
अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान PDA का नारा दिया था, जिसका अर्थ है:
P - पिछड़ा (Backward Classes)
D - दलित (Dalits)
A - अल्पसंख्यक (Minorities)
सपा का दावा है कि यह गठबंधन यूपी की 90% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और भाजपा के 'कमंडल' का असली मुकाबला 'मंडल 2.0' यानी PDA ही है।
सपा की प्रतिक्रिया: "मौर्य भाजपा की भाषा बोल रहे हैं"
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं ने मौर्य के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सपा का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं और वे केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के व्यक्तिगत और बेबुनियाद हमले कर रहे हैं। सपा के अनुसार, PDA एक समावेशी विचारधारा है और दलित समाज अखिलेश यादव के साथ मजबूती से खड़ा है