Garuda Purana : दूसरों की बुराई करने वालों सावधान, मृत्यु के बाद नरक में मिलती है ये भयानक सजा गरुड़ पुराण में है जिक्र
News India Live, Digital Desk : गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को जीवन और मृत्यु के रहस्यों के बारे में बताया है। इस ग्रंथ के अनुसार, जो व्यक्ति अपने जीवन में दूसरों की निंदा करता है, पीठ पीछे बुराई करता है या दूसरों के सम्मान को ठेस पहुँचाता है, उसे मृत्यु के बाद भयानक यातनाएं सहनी पड़ती हैं। गरुड़ पुराण इसे 'वाक-पाप' (वाणी का पाप) की श्रेणी में रखता है।
आलोचना करने वालों को मिलने वाली सजा
गरुड़ पुराण के अनुसार, दूसरों की बुराई करने वाले व्यक्तियों को नरक में निम्नलिखित सजाएं दी जाती हैं:
जीभ काटी जाती है: जो लोग अपनी वाणी का दुरुपयोग दूसरों को नीचा दिखाने या झूठ बोलकर उनकी छवि बिगाड़ने में करते हैं, यमदूत उनकी जीभ को गर्म लोहे के औजारों से दंडित करते हैं।
कुंभीपाकम नरक: दूसरों की बुराई कर उनके जीवन में अशांति पैदा करने वालों को 'कुंभीपाकम' नामक नरक में डाला जाता है, जहाँ उन्हें गर्म तेल के कड़ाहों जैसी यातनाएं दी जाती हैं।
अगले जन्म में प्रभाव: गरुड़ पुराण कहता है कि ऐसे व्यक्ति अगले जन्म में गूंगे हो सकते हैं या उन्हें ऐसी बीमारियां हो सकती हैं जिससे उनकी वाणी प्रभावित हो।
कैसी आलोचना है सबसे बड़ा पाप?
ग्रंथ के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार की आलोचनाएं सबसे अधिक दंडनीय मानी गई हैं:
निर्दोष की निंदा: किसी ऐसे व्यक्ति की बुराई करना जिसने आपका कभी बुरा नहीं किया।
गुरु और माता-पिता की बुराई: अपने मार्गदर्शकों या जन्मदाताओं के बारे में अपशब्द बोलना महापाप की श्रेणी में आता है।
धार्मिक ग्रंथों की निंदा: धर्म और शास्त्रों का मजाक उड़ाना भी नरक के द्वार खोलता है।
पापों से बचने के उपाय
गरुड़ पुराण केवल सजा ही नहीं बताता, बल्कि सुधार का मार्ग भी दिखाता है:
मौन धारण: यदि आप किसी के बारे में अच्छा नहीं बोल सकते, तो चुप रहना ही श्रेष्ठ है।
क्षमा याचना: यदि आपने किसी की बुराई की है, तो जीवित रहते हुए उस व्यक्ति से क्षमा मांगना और अपने व्यवहार में सुधार करना प्रायश्चित का एक तरीका है।
सत्संग और ध्यान: सकारात्मक विचारों की ओर मुड़ना और ईश्वर का नाम जपना वाणी को शुद्ध करता है।