गोंडा में फर्जी वोटों पर सर्जिकल स्ट्राइक ,पंचायत चुनाव से पहले 10 लाख नाम रडार पर
News India Live, Digital Desk: यूपी में पंचायत चुनाव का मतलब सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि गांवों का सबसे बड़ा 'दंगल' होता है। यहाँ हर एक वोट की कीमत प्रधान पद की कुर्सी तय करती है। लेकिन सोचिए, अगर किसी एक जिले में 10 लाख से ज्यादा वोटर ऐसे मिलें जिनका नाम दो-दो जगह है या जो असल में वहाँ रहते ही नहीं, तो चुनाव कितना निष्पक्ष होगा?
यही वो बड़ी सच्चाई है जो उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से सामने आई है। यहाँ की 1192 ग्राम पंचायतों में फिलहाल हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि प्रशासन ने वोटर लिस्ट की गहराई से 'सफाई' करने का फैसला कर लिया है।
ये '10 लाख' का आंकड़ा आखिर क्या है?
प्रारंभिक जांच और आंकड़ों की मानें तो गोंडा में करीब 10 लाख से ज्यादा 'डुप्लीकेट' यानी दोहराव वाले वोटर पाए गए हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जिनका नाम उनके पुराने गांव में भी है और नई जगह पर भी। कुछ ऐसे नाम हैं जो सालो पहले गांव छोड़ चुके हैं, पर उनका नाम लिस्ट से हटाया ही नहीं गया। सबसे दुखद तो ये है कि कुछ लोग जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके नाम पर भी चुनावी रिकॉर्ड में 'वोट' जीवित हैं।
प्रशासन की बड़ी तैयारी: अब 'डोर-टू-डोर' होगी चेकिंग
प्रशासन इस बार किसी भी गलती के मूड में नहीं है। आदेश दे दिए गए हैं कि बीएलओ (BLO) अब घर-घर जाकर सत्यापन (Verification) करेंगे। इसका मतलब है कि अब सिर्फ कागजों पर नाम देखकर काम नहीं चलेगा। सरकारी मुलाजिम खुद आपके दरवाजे पर आएंगे और पूछेंगे कि फलां आदमी यहाँ रहता है या नहीं?
निष्पक्ष चुनाव के लिए ज़रूरी है ये सफाई
अक्सर देखा जाता है कि चुनाव में मामूली अंतर से जीत-हार होती है। ऐसे में ये 10-20 फर्जी वोट भी हारने वाले का खेल बिगाड़ देते हैं और जीतने वाले को 'अनुचित' फायदा पहुँचा देते हैं। गोंडा की वोटर लिस्ट से इन अशुद्धियों को हटाना इसलिए ज़रूरी है ताकि गांव का सही और ईमानदार नेतृत्व सामने आ सके।
वोटरों के लिए मेरी सलाह
अगर आप भी गोंडा या उसके आस-पास के इलाके से हैं, तो ये आपकी जिम्मेदारी है कि एक बार लिस्ट ज़रूर चेक करें। कहीं ऐसा न हो कि आप शहर में रहते हों और गांव की लिस्ट से आपका नाम सफाई अभियान की चपेट में आकर कट जाए। साथ ही, अगर आपके पड़ोस में कोई फर्जी वोट बना है, तो उसकी जानकारी देकर आप एक ईमानदार चुनाव में मदद कर सकते हैं।
इस बड़े 'सफाई अभियान' के बाद गोंडा का चुनावी गणित पूरी तरह बदलने वाला है। देखना दिलचस्प होगा कि जब लिस्ट से ये 10 लाख नाम कम होंगे, तो आने वाले पंचायत चुनाव की तस्वीर कितनी बदलती है।